सिलानी गांव के पास हुई पुलिस मुठभेड़
पुलिस विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वांछित अपराधी शाहिद को पकड़ने के लिए सुरक्षा बलों ने एक विशेष अभियान चलाया था। नूंह क्राइम ब्रांच की टीम को पक्की सूचना मिली थी कि आरोपी गुरुग्राम की तरफ जाने के लिए रास्ते में है। इस पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस दल ने उसकी गाड़ियों और गतिविधियों पर निगरानी रखनी शुरू कर दी। जब संदिग्ध व्यक्ति सिलानी गांव के पास से गुजर रहा था, तब पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास किया और चारों तरफ से घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस दल पर कार्रवाई से बचने के लिए कदम उठाए, जिसके जवाब में पुलिस ने भी अपनी कार्रवाई शुरू कर दी। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच भीषण गोलीबारी और मुठभेड़ हुई। इस गोलीबारी में वांछित अपराधी शाहिद बुरी तरह से जख्मी हो गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पुलिस बल को इसकी सूचना दी गई, जिन्होंने तुरंत मौके पर पहुंचकर पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया और स्थिति का जायजा लिया।
कई गंभीर मामलों में वांछित था आरोपी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मारा गया आरोपी शाहिद विभिन्न प्रकार के गैरकानूनी और संगीन अपराधों में लंबे समय से शामिल रहा था। उस पर मुख्य रूप से गोतस्करी करने और एटीएम मशीनों को उखाड़कर चुराने जैसे कई गंभीर आरोप दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी क्योंकि वह कई थानों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। नूंह क्राइम ब्रांच की टीम को जब यह गुप्त सूचना मिली कि वह गुरुग्राम की ओर किसी आपराधिक मकसद से बढ़ रहा है, तो उन्होंने तुरंत अपनी रणनीति बनाई। पीछा करने के दौरान जब सिलानी गांव के पास उसे घेर लिया गया, तब उसने आत्मसमर्पण करने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। मुठभेड़ समाप्त होने के बाद पुलिस ने घटनास्थल की बारीकी से जांच-पड़ताल की और वहां से साक्ष्य जुटाए। फॉरेंसिक टीम और अन्य संबंधित अधिकारियों ने भी मौके का मुआयना किया ताकि मुठभेड़ से जुड़ी सभी कड़ियों को जोड़ा जा सके। पुलिस के उच्च अधिकारियों ने इस पूरी कार्रवाई की समीक्षा की है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की तथ्यात्मक जांच की जा रही है ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके।
वर्ष 2018 में हिरासत से फरार हुआ था
आपराधिक इतिहास खंगालने पर यह बात सामने आई कि शाहिद उर्फ आडवाणी बेहद शातिर किस्म का अपराधी था जो कानून की पकड़ से बचने के लिए लंबे समय से फरार चल रहा था। उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड इस बात की गवाही देता है कि वह वर्ष 2018 में गुरुग्राम क्राइम ब्रांच की हिरासत से चकमा देकर भाग निकला था। उस दुस्साहसिकफरारी के बाद से ही वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर था और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। इतने लंबे समय तक फरार रहने के बावजूद वह अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देता रहा, जिसमें गोतस्करी और एटीएम उखाड़ने जैसे बड़े अपराध शामिल थे। इस ताजा मुठभेड़ और उसकी मौत के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और उसके अन्य साथियों की तलाश में जुट गई है जो इस अवैध धंधे में उसका साथ देते थे। इस मामले में कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की आवश्यक कार्रवाई तेजी से की जा रही है ताकि इस गिरोह के बाकी बचे सदस्यों को भी कानून के कटघरे में लाया जा सके। पुलिस प्रशासन का यह सख्त रुख इलाके में अपराध पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।