पॉक्सो अदालत में दर्ज हुई पांचवीं गवाही उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित पॉक्सो कोर्ट के अंदर न्याय की दिशा में एक और महत्वपूर्ण चरण पूरा हो चुका है जहाँ इस अति संवेदनशील मामले की सुनवाई के दौरान पांचवी गवाही को पूरी तरह से दर्ज कर लिया गया है। यह पूरा मामला एक दस साल की मासूम बच्ची के साथ हुए अत्यंत क्रूर और अमानवीय बलात्कार तथा उसके बाद हुई उसकी हत्या की दिल दहला देने वाली घटना से जुड़ा हुआ है जिसमें आरोपी कोई और नहीं बल्कि खाकी वर्दी में तैनात एक सिपाही ही था। अदालत के समक्ष इस मामले की सुनवाई लगातार अत्यंत गंभीरता के साथ आगे बढ़ रही है और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए जा रहे सबूतों तथा गवाहों के बयानों को बेहद बारीकी के साथ परखा जा रहा है ताकि इस गंभीर अपराध के प्रत्येक पहलू से पर्दा उठाया जा सके और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जा सके। अदालत कक्ष के भीतर चल रही इस कानूनी प्रक्रिया पर न केवल स्थानीय लोगों की बल्कि पूरे प्रदेश के विधि प्रेमियों की पैनी नजर टिकी हुई है क्योंकि इसमें एक कानून के रक्षक पर ही भक्षक बनने का गंभीर आरोप लगा हुआ है।
खाकी की गरिमा पर दाग और न्यायिक पृष्ठभूमि भारतीय समाज और आपराधिक न्याय प्रणाली के इतिहास में जब कभी भी कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी संभालने वाले किसी शख्स पर ही इस तरह के जघन्य अपराधों के गंभीर आरोप लगते हैं, तो वह पूरा वाकया न केवल शर्मनाक साबित होता है बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी कई तरह के गहरे सवाल खड़े कर देता है। इस विशेष प्रकरण में आरोपी सिपाही द्वारा जिस प्रकार से दस वर्ष की एक नाबालिग बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने के बाद उसकी बेरहमी से जान ली गई, उसने मानवता को शर्मसार करने का काम किया है और ऐसे मामलों में समाज का हर वर्ग त्वरित और कठोरतम सजा की मांग करता है। देश के विभिन्न न्यायालयों में पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत आने वाले मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन इसलिए किया गया है ताकि इस प्रकार के संवेदनशील और गंभीर अपराधों में बिना किसी अनावश्यक देरी के त्वरित गति से न्याय सुनिश्चित किया जा सके और अपराधियों के दिलों में कानून का खौफ पैदा किया जा सके। इस संपूर्ण विधिक संघर्ष के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के बीच दलीलों का दौर लगातार जारी रहता है, जिसमें गवाहों के बयान और चिकित्सीय रिपोर्टों के आधार पर अदालत अपना अंतिम निष्कर्ष तय करने की दिशा में आगे बढ़ती है और समाज में यह संदेश देने का प्रयास किया जाता है कि कानून के हाथ हर व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचते हैं।
अगली सुनवाई की तारीख और आगे की प्रक्रिया अदालत में पांचवी गवाही के सफलतापूर्वक पूर्ण होने के पश्चात अब इस बहुचर्चित मामले में न्याय प्रक्रिया का अगला चरण बेहद नजदीक आ चुका है और सभी की निगाहें आगामी पच्चीस तारीख पर टिकी हुई हैं जब इस प्रकरण में अगली सुनवाई की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। इस प्रकार के जघन्य मामलों में प्रत्येक गवाही और प्रत्येक सबूत का अपना एक अलग और अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान होता है क्योंकि इसी के आधार पर यह तय होता है कि आरोपी को उसके द्वारा किए गए कुकृत्यों के लिए कितनी जल्दी और कितनी कड़ी सजा दी जा सकेगी। अभियोजन पक्ष यह पूरी कोशिश कर रहा है कि सभी गवाहों के बयान समय पर दर्ज करा दिए जाएं ताकि बचाव पक्ष को मामले को लंबा खींचने का अवसर न मिल सके और पीड़ित पक्ष को बिना किसी और विलंब के उचित न्याय मिल सके। इस मामले की अगली सुनवाई के दौरान अदालत में कुछ नए दस्तावेजों या अन्य गवाहों की पेशी की भी संभावना जताई जा रही है, जिस पर सभी कानूनी विशेषज्ञों की विशेष नजर रहेगी और यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी तारीख पर अदालत क्या नया आदेश या निर्देश जारी करती है।