अस्पतालों की फार्मेसी में मिली अनियमितताएं
लखनऊ क्षेत्र के भीतर संचालित विभिन्न चिकित्सा संस्थानों की मेडिकल दुकानों की हाल ही में प्रशासनिक टीमों द्वारा जांच की गई थी। इस औचक निरीक्षण के दौरान कई तरह की गंभीर अनियमितताएं और नियमों का उल्लंघन सामने आया है। कुल चार अस्पतालों की फार्मेसी में इस तरह की खामियां पाई गईं जिसके बाद विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। जांच प्रक्रिया के दौरान यह सामने आया कि इन मेडिकल काउंटरों पर तय नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। इस स्थिति को देखते हुए संबंधित अधिकारियों ने फौरी तौर पर कानूनी प्रावधानों के तहत विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मरीजों को दी जाने वाली दवाओं के रख-रखाव और लाइसेंस संबंधी शर्तों की भी गहनता से समीक्षा की गई थी। निरीक्षण दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इन स्थानों पर पाई गई कमियां सीधे तौर पर मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ जैसी हैं। इसी आधार पर पूरी रिपोर्ट तैयार करके उच्च अधिकारियों को सौंपी गई जिसके बाद आगे के निर्देश जारी किए गए।
तीन को नोटिस और एक पर बिक्री रोक
जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने संलिप्त संस्थानों के खिलाफ दो अलग-अलग तरह के कड़े कदम उठाए हैं। गड़बड़ी के दायरे में आए कुल चार में से तीन अस्पतालों की प्रबंधन समितियों को आधिकारिक नोटिस थमाया गया है। इन तीनों संस्थानों से पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ विधिक और प्रशासनिक अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए। इसके अलावा चौथे अस्पताल की फार्मेसी की व्यावसायिक गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस चौथे संस्थान में अब अगली अनुमति मिलने तक किसी भी प्रकार की दवा की खरीद और बिक्री का कार्य नहीं किया जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक ये संस्थान सभी सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते हैं। नोटिस पाने वाले अस्पतालों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण संबंधित कार्यालय में जमा कराना होगा। तय अवधि में संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में इनके लाइसेंस रद्द करने तक की बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
पारदर्शिता और नियमों का महत्व
चिकित्सा संस्थानों के भीतर चलने वाली फार्मेसी इकाइयों के लिए सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कड़े नियम तय किए गए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य आम जनता और मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं उचित मूल्य पर पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना होता है। किसी भी अस्पताल में दवाइयों का स्टॉक रखने वाले काउंटर को लाइसेंस की शर्तों और फार्मासिस्ट की उपस्थिति के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। जब कभी इन व्यावसायिक और स्वास्थ्य से जुड़े मानकों का उल्लंघन होता है तो इस तरह की प्रशासनिक जांच बैठाई जाती है। लखनऊ में सामने आया यह ताजा मामला अन्य मेडिकल संचालकों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी का काम करता है। इस तरह की औचक कार्रवाई से स्वास्थ्य क्षेत्र में नियमों का पालन करने की प्रवृत्ति बढ़ती है और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगती है। आम नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकारों की रक्षा के लिए इस प्रकार के निरीक्षण भविष्य में भी जारी रहने की पूरी संभावना है। प्रशासन की इस सख्ती से पूरे चिकित्सा व्यापार जगत में हड़कंप मच गया है और सभी लोग अपने दस्तावेजों को दुरुस्त करने में जुट गए हैं।