क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में फर्जी वकील
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हाल ही में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दीपक खत्री नामक व्यक्ति को धर दबोचा है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी को राउज एवेन्यू कोर्ट के समक्ष पेश किया गया था। अदालत में पेशी के दौरान कानूनी दस्तावेजों की जांच की गई तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया। जांच में पता चला कि आरोपी जिस डिग्री के आधार पर खुद को कानून का जानकार बताता था वह पूरी तरह जाली है। दीपक खत्री अदालतों के भीतर घूमता था और खुद को कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का मामा कहकर लोगों पर धौंस जमाता था। कई लोग उसे वास्तव में गैंगस्टर का रिश्तेदार मानते थे लेकिन इस रिश्ते की कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी न केवल वकालत का झूठा दावा करता था बल्कि इसके आड़ में अवैध वसूली का काला कारोबार भी चला रहा था। लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े विभिन्न मामलों के बीच उसका नाम अक्सर सुर्खियों में बना रहता था जिससे लोगों में उसका खौफ था।
अवैध वसूली और फर्जी दस्तावेजों का खेल
दीपक खत्री को हिरासत में लेने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने उसके पूरे आपराधिक इतिहास की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों ने उसके जरिए अंजाम दी गई वसूली की वारदातों के साथ-साथ उसकी शैक्षणिक योग्यताओं की भी गहराई से पड़ताल की। इसके अलावा बार काउंसिल में उसके पंजीकरण की भी बारीकी से जांच की गई जिसके नतीजे बेहद हैरान करने वाले निकले। शुरुआती जांच से साफ हो गया कि उसकी कानूनी डिग्री में एक भी बात असली नहीं थी बल्कि सब कुछ फर्जी था। वकीलों के बीच उसकी काफी अच्छी जान-पहचान थी और इसी रसूख के दम पर वह पिछले कई वर्षों से अदालतों में लगातार पेश हो रहा था। फर्जी कागजातों की बदौलत वह बेखौफ होकर घूमता रहा और आम नागरिकों से बड़ी मात्रा में पैसे ऐंठता रहा। पुलिस अब इस बात की भी पुख्ता जानकारी जुटा रही है कि उसने अपनी इस फर्जी वकालत के जरिए कितने मामलों में लोगों को गुमराह किया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ जाली दस्तावेज तैयार करने और उनका दुरुपयोग करने के आरोप में एक नया मामला जल्द दर्ज किया जाएगा।
कानून व्यवस्था पर सवाल और बड़ी जांच
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद देश की कानून व्यवस्था और अदालती सुरक्षा तंत्र पर कई प्रकार के बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां गंभीर अपराधियों और गैंगस्टरों से जुड़े मामलों की सुनवाई अदालत परिसरों में चल रही थी वहीं दूसरी तरफ एक फर्जी वकील घूम रहा था। यह स्थिति सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिहाज से अत्यंत चिंताजनक मानी जा रही है जिसे लेकर एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। जांच एजेंसियां अब इस पहलू पर भी गंभीरता से काम कर रही हैं कि उसे ये जाली दस्तावेज किसने उपलब्ध कराए थे। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे उसके कौन-कौन से साथी और मददगार शामिल थे। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य इस पूरे अवैध नेटवर्क का पूरी तरह से पर्दाफाश करना है ताकि इसमें लिप्त सभी दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके। दीपक खत्री फिलहाल पुलिस की हिरासत में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है जिससे आने वाले दिनों में और भी कई बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना बनी हुई है।