परीक्षा स्लिप में डिजिटल छेड़छाड़ का मामला
लखनऊ में एक गंभीर साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है जिसमें पीईटी-2026 परीक्षा की सिटी इंटीमेशन स्लिप को निशाना बनाया गया है। परीक्षा नियंत्रक सुभाष चंद्र प्रजापति ने बताया कि आयोग द्वारा 12 अक्टूबर को अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा जनपद की सूचना जारी की गई थी। इसी आधिकारिक दस्तावेज का लाभ उठाकर किसी व्यक्ति ने इसमें डिजिटल माध्यम से जालसाजी की। अपराधी ने स्लिप में अंकित परीक्षा केंद्र के नाम को बदलकर कराची, पाकिस्तान लिख दिया और इस फर्जी तस्वीर को इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर दिया। यह घटना तब प्रकाश में आई जब भ्रामक सूचनाएं आधिकारिक दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने लगीं। आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को गंभीरता से लिया है क्योंकि इससे परीक्षा की गरिमा प्रभावित हो सकती थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है ताकि इस भ्रामक सूचना के स्रोत का पता लगाया जा सके और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सके।
आधिकारिक दस्तावेजों के साथ जालसाजी पर कार्रवाई
सोशल मीडिया पर फैलाई गई इस गलत जानकारी के बाद परीक्षा नियंत्रक ने पुलिस के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। विभूतिखंड थाने के इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह ने पुष्टि की है कि पुलिस ने संबंधित तहरीर के आधार पर कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस तरह की छेड़छाड़ से परीक्षा प्रक्रिया की प्रामाणिकता पर बुरा असर पड़ता है और अभ्यर्थियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है। वर्तमान में पुलिस की साइबर सेल और जांच अधिकारी मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को खंगालने में लगे हुए हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह स्लिप किसने और किस उद्देश्य से एडिट की थी। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल दुनिया में किसी भी सरकारी दस्तावेज को गलत तरीके से पेश करना एक अपराध है और इसमें शामिल व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की टीम अब उन इंटरनेट अकाउंट्स की पहचान कर रही है जिनसे यह भ्रामक सामग्री सबसे पहले प्रसारित की गई थी।
परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और सुरक्षा
पीईटी-2026 की परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधिकारिक सूचनाओं को सोशल मीडिया पर वायरल करने से पहले उनकी सत्यता की जांच करना अत्यंत आवश्यक है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 12 अक्टूबर को जारी की गई सूचना ही पूर्णतः वैध है और अभ्यर्थियों को ऐसी किसी भी भ्रामक पोस्ट पर विश्वास नहीं करना चाहिए। इस प्रकार की साइबर घटनाएं न केवल प्रशासन का समय खराब करती हैं बल्कि आम छात्रों के मानसिक तनाव का कारण भी बनती हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस जालसाजी के पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ है या यह किसी व्यक्ति द्वारा किया गया शरारती कृत्य है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विभाग अपनी डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने पर विचार कर रहा है। सभी छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक पोर्टल से प्राप्त जानकारियों पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैलने वाली ऐसी संदिग्ध सामग्री को साझा करने से बचें।