महेंद्रगढ़ में साझा सेवा केंद्रों से धोखाधड़ी का मामला
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में स्थित साझा सेवा केंद्रों के साथ एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस धोखाधड़ी की शुरुआत तब हुई जब डिजिटल माध्यम से प्राप्त धनराशि साइबर अपराधों से जुड़ी पाई गई और बैंक खातों पर रोक लगा दी गई। बेवल और भोजावास इलाकों के तीन केंद्र प्रबंधकों ने कुल 397650 रुपये की ठगी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। बेवल निवासी संजय कुमार ने पुलिस को बताया कि सात जुलाई को उनके केंद्र पर एक अज्ञात युवक आया था। उस युवक ने मवेशी खरीदने के लिए पचास हजार रुपये की नकदी की आवश्यकता जताई थी। इसके बाद उस व्यक्ति ने केंद्र के स्कैन कोड के जरिए भुगतान अपने खातों में स्थानांतरित करवाया था। जब संजय कुमार ने अगले दिन किसी अन्य व्यक्ति को पैसे भेजने का प्रयास किया तब उनका बैंक खाता बंद होने की बात सामने आई। बैंक अधिकारियों से संपर्क करने पर ज्ञात हुआ कि उस युवक द्वारा ट्रांसफर कराई गई रकम पर साइबर शिकायतों की वजह से होल्ड लगाया गया है। इस तरह की घटनाओं के बाद जब आसपास के अन्य संचालकों से बातचीत की गई तो बड़े पैमाने पर इस फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं और पूरा मामला पुलिस के सामने आ गया।
पुलिस जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी का ब्यौरा
पीड़ित लोगों से मिली जानकारियों के बाद पुलिस ने इस पूरे षड्यंत्र की गहराई से छानबीन शुरू की। भोजावास क्षेत्र के एक अन्य केंद्र के प्रबंधक कृष्ण सिंह को इकतीस हजार रुपये का चूना लगने की बात सामने आई। इसके अलावा आरआर कम्युनिकेशन की संचालिका बबली के साथ भी एक लाख तीन हजार सात सौ बीस रुपये की ठगी होने का पता चला। इन तीनों की संयुक्त शिकायत पर बाईस जुलाई को नारनौल के साइबर अपराध थाने में औपचारिक मुकदमा दर्ज कर आगे की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों ने सभी संबंधित केंद्रों के बैंक खातों का पूरा रिकॉर्ड जुटाया और मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल तथा ग्राहक विवरण की गहनता से जांच की। समन्वय पोर्टल पर जब इन सभी खातों की तालमेल बिठाई गई तो कुल नौ साइबर शिकायतें दर्ज मिलीं। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर इस गिरोह में गितेश नाम के व्यक्ति की संलिप्तता उजागर हुई जिसके बाद पुलिस ने उसे भी दबोच लिया। पकड़े गए दोनों आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं ताकि अवैध लेनदेन के पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया जा सके। बारह अक्टूबर को दोनों आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया गया था जहां से न्यायालय ने आवश्यक पूछताछ और बरामदगी के वास्ते पुलिस को रिमांड सौंपा।
अदालत में पेशी और आगे की कानूनी कार्रवाई
न्यायालय में पेश किए जाने के बाद आरोपियों की आगे की रिमांड अवधि तय की गई। पुलिस हिरासत के दौरान आरोपियों से ठगी गई रकम और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है। जांच अधिकारी गिरतेश से पूछताछ के साथ छिपे हुए अन्य संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका को भी स्पष्ट करने में जुटे हैं। नियमों के तहत गितेश को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया जबकि दूसरे आरोपी विनय यादव को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस गिरोह के तार और कहां-कहां जुड़े हुए हैं तथा किन अन्य लोगों को इन्होंने अपना निशाना बनाया है। इस घटना ने डिजिटल केंद्र चलाने वाले अन्य संचालकों को भी सतर्क कर दिया है ताकि वे ऑनलाइन लेनदेन करते समय पूरी सावधानी बरतें। साइबर सेल की टीम जप्त किए गए मोबाइलों और डिजिटल उपकरणों की फारेंसिक जांच करवा रही है ताकि धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए सभी डिजिटल प्रमाण सुरक्षित किए जा सकें। प्रशासन और साइबर पुलिस की इस मुस्तैदी से उम्मीद जताई जा रही है कि इस गिरोह के बाकी सदस्यों को भी जल्द ही पकड़ लिया जाएगा और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।