डिजिटल अरेस्ट कर लाखों की धोखाधड़ी
अजमेर की एक सेवानिवृत्त महिला शिक्षिका से 80 लाख रुपये की बड़ी साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। केंद्रीय साइबर अपराध थाने की टीम ने इस मामले में दो साल तक गहन तकनीकी जांच करने के बाद फलोदी के रहने वाले बजरंग नामक व्यक्ति को पकड़ा है। पीड़ित शिक्षिका ने 14 नवंबर 2024 को इस घटना के संबंध में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। ठगों ने शिक्षिका के पास एक अज्ञात नंबर से कॉल किया और खुद को साइबर सेल का अधिकारी बताकर उन्हें गंभीर कानूनी कार्रवाई का भय दिखाया। धोखेबाजों ने दावा किया कि शिक्षिका का आधार कार्ड इस्तेमाल कर 25 अलग-अलग बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन किया गया है और यह मामला सीधे मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। डर के कारण शिक्षिका ने उनकी सभी बातें मान लीं और ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनके बैंक खातों की विस्तृत जानकारी हासिल कर ली। इस दौरान उन पर लगातार वीडियो कॉल के जरिए कड़ी निगरानी रखी गई ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें।
बैंक खातों का गलत इस्तेमाल और मनी ट्रेल
आरोपी बजरंग की संलिप्तता का खुलासा कॉल रिकॉर्डिंग, वाट्सएप चैट्स और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से हुई जांच के बाद हुआ। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी ने अपने परिचित संदीप को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम कार्ड इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया था। इसके बदले में उसने कमीशन के रूप में पांच हजार रुपये लिए थे। जांच में पाया गया कि महिला शिक्षिका द्वारा गंवाई गई 80 लाख रुपये की बड़ी रकम में से 2,10,474 रुपये 26 नवंबर 2024 को सीधे बजरंग के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। आरोपी ने उसी दिन एटीएम कार्ड और यूपीआई माध्यमों का प्रयोग करके यह पूरी राशि तुरंत निकाल ली थी। पुलिस टीम ने जब इस पूरे मनी ट्रेल यानी पैसों के आवागमन के रास्ते की पड़ताल की, तो बजरंग की भूमिका संदिग्ध पाई गई। अधिकारियों ने केवाईसी दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर इस जालसाज को फलोदी से गिरफ्तार किया है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने अपने खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध के लिए करने की अनुमति दी थी।
नेटवर्क की जांच और आगे की कार्रवाई
साइबर अपराधियों का यह गिरोह मुख्य रूप से म्यूल बैंक खातों और हवाला चैनलों का उपयोग करके अपनी अवैध कमाई को ठिकाने लगाता था। शिक्षिका ने बदमाशों के निर्देशानुसार आरटीजीएस के माध्यम से 80 लाख रुपये उनके बताए गए विभिन्न बैंक खातों में जमा किए थे। इसके बाद ठगों ने उनसे और अधिक पैसों की मांग की, जिससे उन्हें ठगी का आभास हुआ। पुलिस ने अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू कर दी है ताकि गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों और उन खातों की पहचान की जा सके जिनमें बाकी रकम ट्रांसफर की गई थी। केंद्रीय साइबर अपराध थाने के एसएचओ गजेंद्र शर्मा ने बताया कि अभी भी कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन की फॉरेंसिक जांच जारी है। यह मामला डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते खतरों और आम नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता को दर्शाता है। पुलिस की विशेष टीम अब इस बात का पता लगा रही है कि क्या इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों में भी फैले हुए हैं। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सभी साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा रहा है और अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।