बिजनौर में महिलाओं को बनाया जा रहा है निशाना उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में इन दिनों साइबर अपराधियों द्वारा एक नया और बेहद खतरनाक तरीका अपनाया जा रहा है जिसके तहत विशेष रूप से महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है। अपराधियों का यह गिरोह मुख्य रूप से महिलाओं के संवेदनशील और भावुक स्वभाव का फायदा उठाकर उन्हें अपने जाल में फंसा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फोन कॉल्स और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए भोले-भाले लोगों को भावनात्मकरूप से ब्लैकमेल करने या किसी झूठी कहानी में उलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कई मामलों में यह देखा गया है कि जालसाज खुद को किसी जरूरतमंद, सामाजिक संस्था के प्रतिनिधि या फिर किसी अधिकारी के रूप में पेश करते हैं और फिर मदद के नाम पर या भावनाओं के साथ खिलवाड़ करके बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारियां हासिल कर लेते हैं। इस तरह की वारदतों के चलते न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि पीड़िताओं को मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ रहा है।
बढ़ते अपराधों के पीछे की तकनीकी और सामाजिक पृष्ठभूमि डिजिटल युग के विस्तार के साथ ही देश भर में साइबर अपराधों का ग्राफ तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रहा है और उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला भी इससे अछूता नहीं है। आधुनिक तकनीक और इंटरनेट की पहुंच हर घर तक होने के कारण शातिर ठगों ने आम नागरिकों को ठगने के नए-नए रास्ते खोज निकाले हैं। समाज में महिलाओं को आमतौर पर परोपकारी, सहृदय और दूसरों की मदद करने के लिए तत्पर माना जाता है, और यही मानवीय खूबी अब अपराधियों के लिए एक आसान जरिया बनती जा रही है। इस प्रकार के अपराधी पहले सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से पूरी रेकी करते हैं और फिर सुनियोजित तरीके से भावनात्मक प्रहार करते हैं जिससे पीड़ित व्यक्ति बिना सोचे-समझे उनकी बातों में आ जाता है। वित्तीय साक्षरता की कमी और तकनीकी पहलुओं की पूरी जानकारी न होना भी इस तरह के अपराधों के पनपने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे हालातों से निपटने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं ताकि लोगों को आधुनिक ठगी के इन नए तौर-तरीकों से अवगत कराया जा सके और वे किसी भी अनजान व्यक्ति के बहकावे में आने से बच सकें।
सतर्कता और बचाव के उपाय ही एकमात्र समाधान इस गंभीर समस्या पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस प्रशासन और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने आम जनता से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अनजान कॉल, संदेश या सोशल मीडिया अनुरोध पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए और अपनी व्यक्तिगत तथा बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ भी साझा करने से बचना चाहिए। यदि किसी के साथ इस प्रकार की कोई ठगी हो जाती है, तो उसे तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि समय रहते उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके और पैसे वापस पाने की प्रक्रिया शुरू हो सके। इसके अलावा, स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। सामूहिक जागरूकता और सजगता ही वह मजबूत ढाल है जिसके जरिए बिजनौर और आसपास के क्षेत्रों में इस तरह के साइबर अपराधियों के मंसूबों को पूरी तरह से नाकाम किया जा सकता है।