व्हाट्सएप पर फर्जीवाड़ा कर दो करोड़ की ठगी साइबर अपराध शाखा ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए देश की राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से नौ शातिर साइबर ठगों को धर दबोचा है। इन आरोपियों ने बेहद शातिर तरीके से व्हाट्सएप पर किसी कंपनी के उच्च अधिकारी यानी बॉस की फर्जी प्रोफाइल बनाई और उसके जरिए अपने मातहत कर्मचारियों को झांसे में लिया। इस पूरी डिजिटल साजिश के तहत जालसाजों ने कर्मचारियों को विश्वास दिलाया कि किसी अति आवश्यक व्यावसायिक कार्य के लिए तत्काल धन की आवश्यकता है और देखते ही देखते कुल दो करोड़ रुपये की बड़ी रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवा ली। जब कंपनी के आंतरिक खातों का मिलान किया गया और इस बड़े वित्तीय लेनदेन की सच्चाई सामने आई, तब जाकर इस सुनियोजित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद तुरंत साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया और तकनीकी सर्विलांस तथा डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर पुलिस टीमों ने दिल्ली और लखनऊ में एक साथ दबिश देकर इन सभी नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पहचान का बढ़ता जाल वर्तमान समय में देश भर में ऑनलाइन ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जहां जालसाज अत्याधुनिक तकनीकों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करके आम नागरिकों के साथ-साथ कॉर्पोरेट जगत के कर्मचारियों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। इस विशिष्ट मामले में आरोपियों ने कॉर्पोरेट घरानों की कार्यशैली और वरिष्ठ अधिकारियों के नामों का गहराई से अध्ययन किया था, ताकि किसी को भी संदेशों पर संदेह न हो सके। आमतौर पर ऐसे गिरोह फर्जी सिम कार्ड, किराए पर लिए गए बैंक खातों और मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल करते हैं ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पैनी नजर से बचा जा सके। लखनऊ और दिल्ली जैसे महानगरों में साइबर अपराधियों का यह नेटवर्क संगठित अपराध के रूप में काम कर रहा है, जो भोले-भाले लोगों या फिर दफ्तरों के कर्मचारियों को अपने प्रभाव में लेकर चंद मिनटों में उनकी गाढ़ी कमाई को डिजिटल माध्यमों से साफ कर देता है। इस प्रकार की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि कार्यस्थलों पर डिजिटल सुरक्षा और आधिकारिक संवाद माध्यमों की प्रामाणिकता की जांच कितनी आवश्यक हो गई है, अन्यथा एक छोटी सी लापरवाही से संस्थाओं को करोड़ों का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कानूनी शिकंजा और आगे की सख्त कार्रवाई नौ साइबर ठगों की इस महत्वपूर्ण गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां इस बात का बारीकी से पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कौन है और इनके तार देश के अन्य हिस्सों से जुड़े हैं या नहीं। पकड़े गए सभी आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि उन तमाम बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट की जानकारी जुटाई जा सके जिनमें ठगी गई दो करोड़ रुपये की राशि को विभाजित करके जमा किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के अन्य सहयोगियों को दबोचने के लिए भी कई जगहों पर छापेमारी की कार्रवाई तेज कर दी गई है और अदालत में पेश कर इनकी रिमांड हासिल की जाएगी ताकि वित्तीय लेन-देन के प्रत्येक पहलू को उजागर किया जा सके। इस घटना के बाद से वित्तीय संस्थानों और कॉरपोरेट दफ्तरों में भी सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक मजबूत किया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की व्हाट्सएप आधारित धोखाधड़ी की वारदातों को पूरी तरह से रोका जा सके और दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।