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साइबर ठगी: लखनऊ में पेंशन कार्ड बनवाने के नाम पर बुजुर्ग से 9.85 लाख रुपये की धोखाधड़ी

लखनऊ में तकनीक और डिजिटल सेवाओं के दुरुपयोग का एक नया मामला सामने आया है। पेंशन कार्ड बनवाने के नाम पर एक बुजुर्ग व्यक्ति से नौ लाख पचासी हजार रुपये ठग लिए गए। इस घटना से डिजिटल मंचों पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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Ankit Yadav
18 अक्ट 2026, 14:56
साइबर ठगी: लखनऊ में पेंशन कार्ड बनवाने के नाम पर बुजुर्ग से 9.85 लाख रुपये की धोखाधड़ी

पेंशन कार्ड के नाम पर हुई बड़ी ठगी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बुजुर्ग व्यक्ति साइबर अपराधियों के झांसे में आ गया। साइबर ठगों ने बुजुर्ग को पेंशन कार्ड बनवाने का लालच दिया और डिजिटल माध्यमों से उनके बैंक खाते से नौ लाख पचासी हजार रुपये निकाल लिए। यह घटना दर्शाती है कि कैसे तकनीक का उपयोग करके भोले-भाले नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। बुजुर्ग व्यक्ति को शुरुआत में इस धोखाधड़ी का बिल्कुल भी अहसास नहीं हुआ क्योंकि ठगों ने प्रक्रिया को पूरी तरह से आधिकारिक और वैध दिखाने का नाटक किया था। जब पीड़ित को अपने बैंक खाते से बड़ी रकम कटने का संदेश मिला, तब उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। इस प्रकार के अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है और लखनऊ क्षेत्र में ऐसे कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। अपराधियों ने बड़ी चालाकी से पेंशन योजना का लाभ दिलाने का झांसा दिया और निजी जानकारी हासिल कर ली। बैंक खाते से नौ लाख पचासी हजार रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर होने के बाद पीड़ित ने तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी।

डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग और ठगी का तरीका

आज के दौर में साइबर अपराधी तकनीकी का सहारा लेकर लोगों को आसानी से अपने जाल में फंसा रहे हैं। इस ताजा मामले में भी ठगों ने बुजुर्ग को पेंशन कार्ड तैयार करने की एक फर्जी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने फोन कॉल या संदेश के जरिए संपर्क किया और जरूरी दस्तावेज तथा बैंक विवरण मांग लिए। बुजुर्ग व्यक्ति ने सरकारी सुविधा मिलने की उम्मीद में अपनी गोपनीय जानकारी उन लोगों के साथ साझा कर दी। जैसे ही ठगों को बैंक खाते और ओटीपी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, उन्होंने तुरंत नौ लाख पचासी हजार रुपये की राशि निकाल ली। इस तरह की तकनीकी धोखाधड़ी में अपराधी अक्सर नकली वेबसाइट्स, फर्जी मोबाइल ऐप या फिर लुभावने संदेशों का उपयोग करते हैं। लखनऊ के इस मामले में भी अपराधियों ने पूरी योजना के तहत बुजुर्ग को अपनी बातों में उलझाया। डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण वरिष्ठ नागरिक अक्सर ऐसे जालसाजों का आसान शिकार बन जाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करते समय कितनी अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

साइबर अपराध की पृष्ठभूमि और सावधानी का महत्व

आज के डिजिटल युग में इस प्रकार की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और आम जनता के लिए चिंता का विषय बन चुकी हैं। सरकार और बैंक लगातार लोगों को जागरूक करते रहते हैं कि वे अपनी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारियां किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। पेंशन, राशन कार्ड या अन्य सरकारी योजनाओं के नाम पर आने वाले फर्जी फोन कॉल्स से हमेशा सतर्क रहना चाहिए। तकनीक के विस्तार के साथ ही साइबर अपराधियों ने ठगी के नए-नए और उन्नत तरीके खोज निकाले हैं। लखनऊ की यह घटना इस बात की एक गंभीर चेतावनी है कि हमें ऑनलाइन लेनदेन और डिजिटल पंजीकरण करते समय अत्यधिक चौकस रहना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के साथ इस तरह की धोखाधड़ी होती है, तो उसे तुरंत साइबर सेल या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके। इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में कोई अन्य नागरिक इस तरह की ठगी का शिकार न बने।

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