आगरा में सरकारी नौकरी का झांसा देकर करोड़ों की ठगी
आगरा जिले में बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर 1.25 करोड़ रुपये ठगने का मामला सामने आया है। इस धोखाधड़ी के मुख्य आरोपित वीरू शर्मा ने पुलिस विभाग में सहायक उप निरीक्षक पद पर भर्ती कराने का वादा कर सुनीता सक्सेना और उनके पति अरविंद से 13.25 लाख रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली थी। सुनीता सक्सेना एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं और उनकी मुलाकात वीरू से तब हुई जब वह बीएलओ यानी बूथ लेवल ऑफिसर का कार्य कर रही थीं। डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य ने बताया कि आरोपित केवल 12वीं कक्षा तक पढ़ा है, लेकिन उसने खुद को एक बड़े अधिकारी के करीब बताकर लोगों का भरोसा जीता। उसने अकेले इस काम को अंजाम नहीं दिया, बल्कि उसके साथ एक और साथी भी शामिल था। यह गिरोह बड़े ही सुनियोजित तरीके से बेरोजगारों को अपने जाल में फंसाता था और उनसे सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का लालच देकर मोटी रकम वसूलता था। आरोपितों ने अपनी ठगी के लिए पुलिस, सचिवालय, स्वास्थ्य विभाग और धौलपुर बेसिक शिक्षा कार्यालय जैसे विभिन्न सरकारी विभागों का नाम इस्तेमाल किया।
फर्जी नियुक्ति पत्र देकर बेरोजगारों को बनाया शिकार
वीरू शर्मा का गिरोह ठगी की प्रक्रिया को बेहद चालाकी से पूरा करता था ताकि शिकार को शक न हो। शुरुआती दौर में आरोपित बेरोजगारों का भरोसा जीतने का काम करते थे और जब उन्हें विश्वास हो जाता था, तब वे नौकरी लगवाने के नाम पर मोटी रकम ले लेते थे। लोगों को विश्वास में रखने के लिए गिरोह द्वारा युवाओं को फर्जी ज्वाइनिंग लेटर यानी नियुक्ति पत्र थमा दिए जाते थे। जब पीड़ित युवक अपना काम ज्वाइन करने के लिए संबंधित सरकारी कार्यालयों में पहुंचते थे, तब उन्हें पता चलता था कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है और उनके हाथ में मिला दस्तावेज पूरी तरह से नकली है। डीसीपी साइबर क्राइम ने स्पष्ट किया कि आरोपित ने केवल एक दंपति से ही नहीं, बल्कि कई अन्य बेरोजगारों को भी इसी तरह ठगा है। पुलिस ने इस मामले में आरोपित वीरू शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उसके खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। वर्तमान में पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क की गहनता से जांच कर रही है ताकि अन्य पीड़ितों तक पहुंचा जा सके और पूरे गिरोह को पकड़ा जा सके।
कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग और पुलिस की आगे की कार्रवाई
पुलिस प्रशासन ने इस धोखाधड़ी के मामले में गंभीर धाराएं बढ़ा दी हैं, जिसमें कूटरचित प्रपत्र यानी जाली दस्तावेज तैयार करना और इलेक्ट्रानिक अभिलेखों के गलत प्रयोग का आरोप शामिल है। इस मामले में पुलिस का यह सख्त रुख स्पष्ट करता है कि सरकारी नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी को रोकने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह से सतर्क है। बेरोजगार युवाओं को भी सलाह दी जाती है कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति के झांसे में न आएं जो उन्हें बिना उचित भर्ती प्रक्रिया के नौकरी दिलाने का दावा करता हो। वीरू शर्मा जैसे लोग समाज में खुद को प्रभावशाली बताकर लोगों की मेहनत की कमाई हड़प लेते हैं। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी नौकरी के लिए होने वाली भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सतर्कता की आवश्यकता को उजागर किया है। चूंकि आरोपित ने पुलिस विभाग तक का नाम इस्तेमाल किया है, इसलिए विभाग इस मामले को बहुत ही गंभीरता से ले रहा है। फिलहाल, जेल भेजे गए आरोपित के खिलाफ पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी है और मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से छानबीन की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।