गाड़ी जब्ती और फर्जीवाड़े की कड़ियां
कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली जांच एजेंसी के संज्ञान में यह बात आई थी कि धोखाधड़ी के जरिए जुटाई गई धनराशि का इस्तेमाल एक वाहन खरीदने के लिए किया गया था। इस चार पहिया वाहन का नंबर डीएल 6सीएम 3920 है। पुलिस की छानबीन के दौरान पता चला कि इस मोटर वाहन को दिल्ली के महिपालपुर इलाके में पंजीकृत कराया गया था। मुख्य आरोपी ने इस वाहन को अपनी महिला मित्र श्रद्धा दुबे के नाम पर रजिस्टर्ड करवाया था। मामले की तहकीकात कर रही टीम ने साक्ष्यों के आधार पर इस वाहन को अपने कब्जे में ले लिया है। इस प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों ने पाया कि जिस धनराशि से यह गाड़ी खरीदी गई थी, वह वैध स्रोतों से नहीं आई थी। पुलिस इस पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल कर रही है और वित्तीय लेनदेन के तमाम पहलुओं को खंगाल रही है ताकि मामले से जुड़े अन्य तथ्यों तक पहुंचा जा सके।
साइबर अपराध और धोखाधड़ी का घटनाक्रम
यह पूरा मामला वर्ष 2024 के दौरान सामने आया था जब सहारनपुर जिले में एक बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया था। वहां स्थित परांकुर अस्पताल से जुड़े सर्जन डॉक्टर प्रभात कुमार वर्मा को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत लंबित चिकित्सा बिलों का भुगतान कराने का झूठा प्रलोभन दिया गया था। इस झांसे में आकर डॉक्टर को लगभग 90.59 लाख रुपये की भारी भरकम राशि से हाथ धोना पड़ा था। पीड़ित की तरफ से आधिकारिक शिकायत मिलने के बाद साइबर अपराध से जुड़ी थाना पुलिस ने तुरंत इस पूरे मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी थी। पुलिस दल ने तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया। इस सिलसिले में दिसंबर 2024 के दौरान लखनऊ से अंकित जायसवाल सहित कुल तीन आरोपियों को दबोच लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद से मुख्य आरोपी अंकित को सहारनपुर जेल में रखा गया है, जहां वह न्यायिक हिरासत के तहत बंद है और पुलिस उससे जुड़े अन्य पहलुओं की भी लगातार पूछताछ कर रही है।
संपत्ति की जांच और आगे की कार्रवाई
धोखाधड़ी के जरिए बनाई गई संपत्तियों का ब्योरा जुटाने के क्रम में पुलिस अधिकारियों ने विभिन्न परिसंपत्तियों की वित्तीय पड़ताल की थी। इसी खोजबीन के दौरान उस स्कोडा कार के बारे में पुख्ता जानकारी मिली जिसे गैरकानूनी तरीके से जुटाई गई रकम के जरिए खरीदा गया था। पुलिस के अनुसार, लखनऊ के रहने वाले अंकित जायसवाल ने इस वाहन को धोखाधड़ी के पैसों से ही खरीदा था और इसके दस्तावेजों में अपनी महिला मित्र का नाम दर्ज करवाया था। अधिकारियों ने वित्तीय स्रोतों की जांच पूरी करने के बाद इस वाहन को जब्ती की कार्रवाई के दायरे में ले लिया। इस बड़ी कार्रवाई से अपराधियों द्वारा अवैध रूप से बनाई गई संपत्तियों पर शिकंजा कसने में मदद मिली है। पुलिस विभाग का यह मानना है कि इस तरह के मामलों में संलिप्त अन्य लोगों और उनकी संपत्तियों की भी लगातार पहचान की जा रही है ताकि कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके और पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सके।