अवैध कटान पर वन विभाग का औचक छापा हरियाणा के पंचकूला जिले के अंतर्गत आने वाले एक संदेहास्पद वन क्षेत्र में वन विभाग के दस्ते ने औचक निरीक्षण के दौरान गैरकानूनी रूप से काटे जा रहे पेड़ों के मामले का बड़ा पर्दाफाश किया है। विभागीय गश्ती दल को अपनी नियमित गश्त के दौरान जंगल के भीतर संदिग्ध गतिविधियों की भनक लगी, जिसके बाद तुरंत सतर्कता बरतते हुए मौके पर दबिश दी गई। इस त्वरित कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने पाया कि लकड़ी तस्करों द्वारा बहुमूल्य प्रजाति के कुल छह पेड़ों को अवैध तरीके से काटकर जमीन पर गिरा दिया गया था। तस्कर इन लकड़ियों को ठिकाने लगाने की जुगत में थे कि तभी वन कर्मियों की टीम तय समय पर वहां पहुंच गई। विभाग की इस अचानक हुई कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मच गया और वे स्थिति भांपते हुए मौके पर अपनी एक वाहन लेकर तेजी से फरार होने में कामयाब हो गए। हालांकि मौके पर छोड़े गए साक्ष्यों और कटे हुए पेड़ों के अवशेषों को विभागीय टीम ने अपने कब्जे में ले लिया है और पूरे मामले की गहराई से छानबीन शुरू कर दी गई है।
खैर की लकड़ी का अवैध कारोबार और सुरक्षा चुनौतियां भारतीय जंगलों में खैर के पेड़ों का इस प्रकार अवैध कटान पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद चिंताजनक और गंभीर विषय माना जाता है। उत्तर भारत के शिवालिक पहाड़ियों से सटे इन इलाकों में खैर के पेड़ों की बहुतायत पाई जाती है, जिनकी लकड़ी का उपयोग कथा बनाने और अन्य वाणिज्यिक कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इनकी उच्च बाजार मांग के कारण संगठित लकड़ी तस्कर अक्सर इन वनों को अपना आसान निशाना बनाते हैं और अंधेरे या सुनसान रास्तों का लाभ उठाकर वन संपदा को नुकसान पहुंचाते हैं। वन विभाग और अन्य प्रशासनिक एजेंसियों के सामने इन विस्तृत और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी करना एक बहुत बड़ी चुनौती रहता है। कई बार सीमित संसाधनों और कम कर्मचारियों के होने के कारण तस्कर दूरदराज के इलाकों में अपनी अवैध गतिविधियों को अंजाम देकर आसानी से बच निकलते हैं। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए न केवल गश्त व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना आवश्यक है, बल्कि वन कर्मियों को अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा उपकरणों से लैस करना भी समय की सबसे बड़ी मांग बन गया है।
फरार आरोपियों की तलाश और कानूनी कार्रवाई वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पूरी घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और फरार हुए तस्करों की धरपकड़ के लिए एक विशेष जांच अभियान का खाका तैयार किया है। मौके पर छोड़े गए वाहन के नंबर प्लेट और अन्य भौतिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस तथा वन विभाग की संयुक्त टीमें वाहन स्वामियों और इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी हुई हैं। आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि तस्कर किस दिशा में भागे हैं और उनके संपर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और भारतीय वन अधिनियम के सुसंगत प्रावधानों के तहत कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। भविष्य में इस प्रकार के अवैध कटान को रोकने के लिए रात्रि गश्त को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है तथा वन क्षेत्रों के प्रवेश द्वारों पर निगरानी चौकियों को भी पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया गया है ताकि पर्यावरण और वन्य संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।