विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाला गिरोह
नोएडा स्थित एक कॉल सेंटर में काम करने का अनुभव रखने वाले आशीष नगर ने ठगी का अपना अलग नेटवर्क तैयार किया था। वह तीन महीने पहले ही अपनी पिछली नौकरी को छोड़कर देहरादून आ गया था और वहां अलग-अलग स्थानों पर अवैध रूप से काम कर रहा था। इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और कनाडा के विदेशी नागरिकों को निशाना बनाना था। आशीष नगर ने अपने मोबाइल नंबर को ट्रू कॉलर ऐप पर बास नाम से सेव कर रखा था ताकि किसी को शक न हो। वह गूगल वॉइस ऐप का उपयोग करके विदेशी नागरिकों को फोन करता था। उसने ऐसे लगभग 5000 मोबाइल नंबर खरीदे थे जिनसे वह और उसके साथी लगातार संपर्क करते थे। ये लोग विदेशी नागरिकों को उनके फोन में तकनीकी खराबी होने का झांसा देते थे और उसे ठीक करने के नाम पर उनसे पैसे ठगते थे। यह पूरा ऑपरेशन पुलिस की नजर से बचने के लिए अलग-अलग ठिकानों से संचालित किया जाता था।
ठगी और गिफ्ट कार्ड का पूरा जाल
आशीष नगर और उसके साथी विदेशी नागरिकों को झांसे में लेने के लिए उन्हें अवास्ट एंटीवायरस ऐप डाउनलोड करने की सलाह देते थे। इस ऐप को उपलब्ध कराने के बदले वे शिकार से 100 डॉलर कीमत का गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए कहते थे। जब उन्हें गिफ्ट कार्ड या भुगतान प्राप्त हो जाता था, तो वे बेहद चालाकी करते थे। अपने गिरोह की कार्यप्रणाली के तहत वे केवल 10 प्रतिशत ग्राहकों को ही एंटीवायरस ऐप उपलब्ध कराते थे और बाकी सभी के साथ धोखाधड़ी की जाती थी। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इन विदेशी नागरिकों से प्राप्त गिफ्ट कार्ड को वे आगे चाइनीज नागरिकों को बेच देते थे। इसके बदले चीनी नागरिक उनके खातों में पैसे जमा करते थे। इस तरह से यह गिरोह बड़ी सफाई से अपनी ठगी की रकम को भारतीय खातों में बदलवाकर उसे सफेद करने का काम करता था और लगातार अपना ठिकाना बदलकर पुलिस कार्रवाई से बचने का प्रयास करता था।
नोएडा कनेक्शन और ठगी का इतिहास
इस गिरोह के सरगना आशीष नगर का इतिहास नोएडा के कॉल सेंटर से जुड़ा है, जहाँ से उसने ठगी की बारीकियां सीखीं। उसने नोएडा में काम करते समय विदेशी लोगों को कॉल करके ठगने की घटनाओं को अंजाम देना शुरू किया था, जिसे बाद में उसने देहरादून में अपने स्तर पर संगठित किया। इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने उन तरीकों को भी सार्वजनिक किया है जिनसे ये लोग खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश करते थे। पुलिस कार्रवाई के डर से ये लोग कुछ दिन तक ही एक कॉल सेंटर चलाते थे और फिर जगह बदल लेते थे। यह पूरी प्रक्रिया यह दर्शाती है कि कैसे साइबर अपराधी तकनीक का दुरुपयोग करके अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार बैठे लोगों को आसानी से अपना शिकार बना रहे हैं। आम नागरिकों और विदेशी उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि ये गिरोह लगातार अपने काम करने के तरीके को बदल रहे हैं और नए-नए एप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।