मासूम बच्चे को झांसे में लेकर की गई बड़ी चोरी घटना उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की है जहाँ एक परिचित ने आपराधिक मंशा को अंजाम देते हुए बड़ी वारदात को पूरा किया। बिहार से ताल्लुक रखने वाला एक पड़ोसी परिवार के भीतर तक अपनी पैठ बना चुका था और उसने बच्चों के साथ घुलना-मिलना शुरू कर दिया था। योजना के तहत उसने घर के एक आठ साल के छोटे बच्चे को निशाना बनाया और उसे एक चमकदार मोटरसाइकिल पर घुमाने का लालच दिया। मासूम बच्चा इस बहकावे में पूरी तरह आ गया और उसने आरोपी की चिकनी-चुपड़ी बातों पर भरोसा कर लिया। इसके बाद आरोपी ने बच्चे को उकसाया कि वह अपनी माता के संदूक या बक्से से सोने-चांदी के सभी कीमती जेवर चुपचाप बाहर ले आए। नासमझ बच्चे ने बिना किसी बुरी नीयत के अपने घर के बक्से से लगभग 6 लाख रुपये मूल्य के सोने और अन्य बहुमूल्य आभूषण निकालकर उस शातिर व्यक्ति को सौंप दिए। जब बच्चे की माँ को इस बड़े नुकसान का पता चला तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और परिवार में कोहराम मच गया। तुरंत इसकी सूचना स्थानीय थाने को दी गई जहाँ पुलिस ने गंभीरता दिखाते हुए भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत औपचारिक मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपी की तलाश में कई जगहों पर दबिश दी जा रही है।
आपसी संबंधों की आड़ में पनपते अपराधों की बढ़ती प्रवृत्ति इस प्रकार की आपराधिक घटनाएं समाज के ताने-बाने और आपसी विश्वास पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती हैं जब कोई करीबी ही इस तरह की जालसाजी में संलिप्त पाया जाता है। आमतौर पर ग्रामीण और शहरी बस्तियों में पड़ोसी लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं और बच्चे भी पड़ोसियों के बीच बेझिझक आते-जाते रहते हैं। लेकिन जब कोई आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति इस सामाजिक सरलता का गलत फायदा उठाने लगता है तो सुरक्षा और भरोसे की पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है। ऐसे मामलों में बच्चों की मासूमियत और उनकी कम उम्र का फायदा उठाकर उन्हें अपने नापाक मंसूबों का मोहरा बनाया जाता है, जिसके बारे में घर के बड़े लोग कभी सोच भी नहीं सकते। पुलिस अधिकारियों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों को इस तरह के बाहरी प्रलोभनों और अनजान लोगों की बातों से दूर रहने के लिए जागरूक करना बेहद आवश्यक हो गया है ताकि इस प्रकार के शातिर अपराधी किसी भी मासूम को अपनी धोखाधड़ी का शिकार न बना सकें। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि घरेलू सुरक्षा और पारिवारिक मामलों में भी अब बाहरी लोगों पर बहुत अधिक आँख मूंदकर भरोसा करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है, जिससे हर नागरिक को सबक लेने की जरूरत है।
कानूनी शिकंजा और पुलिस की आगामी तफ्तीश की दिशा प्राप्त हुई प्राथमिकी के आधार पर अब गोरखपुर पुलिस इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है ताकि लूटे गए सभी आभूषणों को सकुशल बरामद किया जा सके। जांच अधिकारियों का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि आरोपी पड़ोसी घटना को अंजाम देने के बाद किस दिशा में फरार हुआ और क्या इस साजिश में उसके साथ कोई अन्य स्थानीय मददगार भी शामिल था या नहीं। इसके लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और उन संदिग्ध रास्तों की पहचान की जा रही है जिनका इस्तेमाल आरोपी ने भागने के लिए किया होगा। पुलिस दल बिहार सीमा से जुड़े संभावित ठिकानों पर भी नजर बनाए हुए है ताकि आरोपी को जल्द से जल्द दबोचा जा सके और कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके। इस मामले के सामने आने के बाद से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे मांग कर रहे हैं कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई दूसरा व्यक्ति इस तरह की नीच हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके। जैसे-जैसे पुलिस की पूछताछ आगे बढ़ेगी, इस सनसनीखेज धोखाधड़ी के अन्य कई छिपे हुए पहलुओं से भी पर्दा उठने की पूरी संभावना है, जिससे न्याय मिलने की उम्मीद और अधिक मजबूत हो गई है।