उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में नकली और अधोमानक (सब-स्टैंडर्ड) दवाओं के अवैध कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और पुलिस की संयुक्त टीमों ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में छापेमारी कर इस अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसके तहत अब तक 16 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं।
कार्रवाई की मुख्य बातें और मुख्य बिंदु:
छापेमारी और जब्ती: लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और आगरा सहित कई प्रमुख जिलों में मेडिकल स्टोरों, गोदामों और संदिग्ध निर्माण इकाइयों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस दौरान करोड़ों रुपये मूल्य की नकली दवाएं, एंटीबायोटिक्स और जीवन रक्षक औषधियां जब्त की गईं।
16 एफआईआर दर्ज: इस धंधे में शामिल मुख्य सप्लायरों, निर्माणकर्ताओं और विक्रेताओं के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम (Drugs and Cosmetics Act) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत 16 मामले दर्ज किए गए हैं।
लाइसेंस रद्द और गिरफ्तारी: कई मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निलंबित या रद्द कर दिए गए हैं। साथ ही, नकली दवाओं की सप्लाई चेन में शामिल कई प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की सख्त चेतावनी
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। औषधि नियंत्रक विभाग ने सभी दवा विक्रेताओं को निर्देश जारी किए हैं कि वे केवल अधिकृत और पंजीकृत निर्माताओं से ही दवाएं खरीदें, अन्यथा सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।