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ब्रिक्स समिट: भारत को क्या मिलेगा? जानिए इस बड़े वैश्विक सम्मेलन के फायदे

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन के बीच यह सवाल सबसे अहम है कि इस वैश्विक मंच से भारत को आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर क्या कुछ खास हासिल हो सकता है।

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Ankit Yadav
12 सित 2026, 11:01
ब्रिक्स समिट: भारत को क्या मिलेगा? जानिए इस बड़े वैश्विक सम्मेलन के फायदे
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और प्रभाव के बीच ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का आयोजन एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम है। इस बड़े आयोजन को लेकर देश भर में चर्चाओं का दौर जारी है, और विशेष रूप से राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में यह जानने की उत्सुकता है कि इस सम्मेलन से भारत को किस प्रकार के दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ब्रिक्स जैसे मजबूत मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी से देश के आर्थिक हितों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ कूटनीतिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलती है।

आर्थिक और व्यापारिक लाभ

व्यापारिक दृष्टिकोण से देखें तो ब्रिक्स समूह दुनिया के कई उभरते हुए बड़े बाजारों को आपस में जोड़ता है। इस मंच के माध्यम से भारत अपने निर्यात को बढ़ाने, आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठा सकता है। लखनऊ सहित देश के विभिन्न हिस्सों के उद्योगपतियों और व्यापारियों की नजरें भी इस सम्मेलन के नतीजों पर टिकी हैं, क्योंकि वैश्विक स्तर पर होने वाले इन समझौतों का असर अंततः घरेलू बाजारों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों पर भी पड़ता है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए इस प्रकार के मंच बेहद कारगर साबित होते हैं। रणनीतिक और भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी भारत के लिए इस सम्मेलन के मायने बहुत गहरे हैं। आज के समय में जब पूरी दुनिया विभिन्न आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, तब विकासशील देशों की आवाज को बुलंद करने के लिए ब्रिक्स एक सशक्त माध्यम के रूप में उभरकर सामने आया है। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख अपनाने, जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर अपनी बात मजबूती से रखने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग उठाने के लिए भारत इस मंच का उपयोग अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप कर सकता है।

भविष्य की दिशा और आगामी कदम

आने वाले दिनों में इस शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाले समझौतों और वार्ताओं के परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आएंगे। भारत सरकार हमेशा से ही बहुपक्षीय मंचों पर अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखती आई है और उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी देश को तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और बुनियादी ढांचा विकास जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदारियां हासिल होंगी। आम नागरिकों से लेकर बड़े निवेशकों तक सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ब्रिक्स के जरिए भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को और कितना मजबूत कर पाता है।
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