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चंद्र ग्रहण अपडेट: भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण, रक्षाबंधन पर सूतक काल भी नहीं

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर खगोलीय घटनाओं को लेकर देश भर में असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिसके कारण इसका कोई भी धार्मिक प्रभाव यहाँ नहीं पड़ेगा।

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Ankit Yadav
26 अग 2026, 13:48
चंद्र ग्रहण अपडेट: भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण, रक्षाबंधन पर सूतक काल भी नहीं
देश भर में भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक पर्व रक्षाबंधन को लेकर लोगों के मन में खगोलीय घटनाओं के प्रभाव को लेकर कई तरह की जिज्ञासाएं और सवाल बने हुए थे। विशेष रूप से चंद्र ग्रहण और उसके कारण लगने वाले सूतक काल को लेकर आम जनता में असमंजस की स्थिति देखी जा रही थी। पंचांग और ज्योतिषीय आकलन के अनुसार इस बार का चंद्र ग्रहण भारतीय भू-भाग पर नजर नहीं आएगा, जिसका सीधा सा अर्थ यह है कि इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व देश के भीतर प्रभावी नहीं होगा। इस संदर्भ में जानकारों ने स्पष्ट किया है कि जब तक कोई ग्रहण किसी क्षेत्र विशेष में दिखाई न दे, तब तक वहां सूतक नियमों का पालन करना अनिवार्य नहीं माना जाता है।

सूतक काल और धार्मिक नियम

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी चंद्र ग्रहण के शुरू होने से लगभग नौ घंटे पहले सूतक काल का आरंभ हो जाता है, जिसके दौरान कई तरह के शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों पर रोक रहती है। हालांकि, चूंकि यह खगोलीय परिघटना भारतीय समयानुसार या भौगोलिक स्थिति के कारण हमारे देश में दृश्यमान नहीं होगी, इसलिए इसका सूतक काल भी यहाँ मान्य नहीं होगा। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बिना किसी बाधा या संकोच के लोग अपने पारंपरिक पर्व को हर्षोल्लास के साथ मना सकेंगे। धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो सूतक न होने के कारण पूजा-पाठ, खान-पान और अन्य मांगलिक गतिविधियों पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं रहेगा, जिससे त्योहार का आनंद पूरी तरह से बरकरार रहेगा। पर्व की तैयारियों में जुटे नागरिकों और श्रद्धालुओं के लिए यह एक बड़ी राहत भरी खबर है क्योंकि वे बिना किसी मानसिक दुविधा के अपने पारिवारिक आयोजनों को संपन्न कर सकते हैं। ज्योतिषविदों ने भी लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और पंचांग आधारितथथ्यों को ही प्राथमिकता दें। खगोलीय दृष्टिकोण से यह घटना दुनिया के अन्य हिस्सों में भले ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराए, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप के निवासियों के लिए यह पूरी तरह से सामान्य रहने वाली है। रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण उत्सव पर किसी भी प्रकार के ग्रहण या अशुभ साए का न होना पर्व की उमंग को और अधिक बढ़ा देता है। देश के विभिन्न हिस्सों में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने और उनकी लंबी उम्र की कामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। प्रशासन और धार्मिक संस्थानों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि इस दिन किसी भी प्रकार के विशेष धार्मिक नियमों के पालन की आवश्यकता नहीं है, जिससे हर कोई अपने पर्व को पारंपरिक उत्साह के साथ मना सकेगा।
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