कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल में बाढ़ : चीन पर उठ रहे सवालों पर क्या कह रहा है अंतरराष्ट्रीय मीडिया      भारत ने दो बार बुलाया, तारिक रहमान नहीं आए; विवाद के बावजूद बालेन शाह ने दिल्ली क्यों चुनी?      उत्तराखंड पर मंडराया खतरा, ग्लेशियरों के पिघलने से उच्च हिमालयी क्षेत्र में बनीं 77 नई झीलें      Raksha Bandhan 2026 Wishes: बड़े भाई से छोटे भाई तक, हर रिश्ते के लिए भेजें ये खास मैसेज, दिल में घुल जाएगा...      सोनिया गांधी पर किताब प्रकाशित नहीं करेगा पेंगुइन इंडिया, संपादकीय बदलाव से लेखिका का इनकार      Raksha Bandhan 2026: आज पूरे दिन पंचक, सुबह का मुहूर्त निकला, दोपहर में कब बांधें राखी?      अभिजीत दीपके ने अरविंद केजरीवाल को पछाड़ दिया! सर्वे में CJP चीफ ने चौंकाया      भारत खरीदेगा दुनिया का सबसे खतरनाक एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम 'जैवलिन', क्यों खास है ये अमेरिकी हथियार     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
धर्म

पाबंदी का असमंजस: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर लगने जा रहा है चंद्र ग्रहण, क्या राखी बांधने पर लगेगी रोक

वर्ष 2026 के रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण लगने की संभावना है, जिससे देश भर के लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या त्योहार के दिन राखी बांधने पर किसी तरह की रोक रहेगी या नहीं।

A
Ankit Yadav
27 अग 2026, 15:42
पाबंदी का असमंजस: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर लगने जा रहा है चंद्र ग्रहण, क्या राखी बांधने पर लगेगी रोक
सनातन संस्कृति में भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार इस वर्ष एक विशेष खगोलीय घटना के साये में मनाया जाने वाला है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन के पावन अवसर पर ही चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस स्थिति ने आम जनमानस के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है, क्योंकि पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल और उससे जुड़े सूतक काल के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य या मांगलिक अनुष्ठान करने की मनाही होती है।

सूतक काल और परंपराओं का प्रभाव

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो किसी भी ग्रहण से पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है, जो कि धार्मिक अनुष्ठानों की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में सवाल यह उत्पन्न होता है कि क्या बहनें अपने भाइयों की कलाई पर नियत समय पर राखी बांध सकेंगी या उन्हें किसी प्रकार के नियमों और पाबंदियों का पालन करना होगा। पंडितों और ज्योतिषविदों के अनुसार, पर्व और ग्रहण के संपातक संयोग के समय कई बार विशेष मुहूर्त निकाले जाते हैं ताकि धार्मिक मर्यादाओं का पालन भी हो सके और त्योहार की भावना भी आहत न हो। आम जनता के बीच इस बात को लेकर खासी चर्चा है कि क्या इस खगोलीय घटना के कारण इस बार राखी बांधने के पारंपरिक समय में कोई बदलाव करना पड़ेगा। हालांकि, इस तरह के अवसरों पर धार्मिक ग्रंथों और पंचांग की सटीक गणना के आधार पर ही निर्णय लिए जाते हैं ताकि लोगों को असमंजस से मुक्ति मिल सके। ज्योतिषीय जानकारों का यह भी मानना है कि सूतक काल के नियमों का पालन अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन हर परिस्थिति के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष प्रावधान और समय-सारणी दी गई होती है।

त्योहारी उल्लास और ज्योतिषीय सलाह

त्योहारों के मौसम में इस तरह के खगोलीय संयोग अक्सर लोगों के मन में संशय पैदा कर देते हैं, लेकिन विद्वानों की सलाह हमेशा यही रहती है कि बिना किसी घबराहट के पंचांगीय शुद्धता का ध्यान रखा जाए। इस वर्ष रक्षाबंधन पर लगने वाले चंद्र ग्रहण के संदर्भ में भी विभिन्न धार्मिक संस्थानों और ज्योतिषियों द्वारा स्थिति को स्पष्ट किया जा रहा है ताकि बहनें बिना किसी दुविधा के अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकें। आगामी दिनों में इसको लेकर और अधिक स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आने की उम्मीद है, जिससे त्योहार का आनंद पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा सके।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज