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पाताल लोक से शुरुआत: जानिए कैसे एक अनोखे वचन के कारण बंधी थी पहली राखी

रक्षाबंधन का पावन पर्व हर साल भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस विशेष त्योहार की शुरुआत पाताल लोक से जुड़ी हुई थी और एक अनोखे वचन के कारण कलाई पर पहली बार रक्षा सूत्र बांधा गया था?

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Ankit Yadav
21 अग 2026, 12:33
पाताल लोक से शुरुआत: जानिए कैसे एक अनोखे वचन के कारण बंधी थी पहली राखी
सनातन संस्कृति में रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहन के रिश्ते की पवित्रता और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाए जाने वाले इस त्योहार की जड़ें केवल भूलोक तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका संबंध पाताल लोक से भी गहरा है। इस पर्व के इतिहास को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं जो इसके महत्व को और अधिक बढ़ा देती हैं। इन कथाओं में एक प्रसंग ऐसा भी आता है जो इस परंपरा की उत्पत्ति के मूल रहस्यों को उजागर करता है।

पाताल लोक और वचन का रहस्य

हर साल जब भी रक्षाबंधन का समय आता है, तो प्राचीन कथाओं का स्मरण किया जाता है जो हमारे धार्मिक ग्रंथों में निहित हैं। कहा जाता है कि एक बार विशेष परिस्थितियों के कारण देवताओं और असुरों के बीच की घटनाओं के दौरान ऐसा प्रसंग बना, जिसके फलस्वरूप पाताल लोक में भी रक्षा सूत्र के बंधन की महत्ता स्थापित हुई। यह कथा हमें सिखाती है कि रक्षाबंधन केवल एक धागा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा अटूट वादा है जो दो पक्षों के बीच कर्तव्य, सुरक्षा और समर्पण का भाव पैदा करता है। जब किसी को संकट से उबारने के लिए कोई वचन दिया जाता है, तो उस वचन की लाज रखने के लिए कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा शुरू हुई थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने बलि राजा को दिए गए वचन के कारण पाताल लोक में निवास करना स्वीकार किया था, तब देवी लक्ष्मी ने राजा बलि के पास जाकर उन्हें अपना भाई बनाया था। इस प्रसंग के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है। भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा में क्षीरसागर लौट सकें, इसके लिए माता लक्ष्मी ने एक अनूठी युक्ति निकाली। उन्होंने पाताल लोक के राजा बलि के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया और उपहार स्वरूप भगवान विष्णु को मांग लिया। इस प्रकार पाताल लोक से ही इस पावन पर्व की वास्तविक शुरुआत मानी जाती है जो आज भी भाई-बहन के रिश्ते को मजबूती प्रदान करती है। आज के समय में रक्षाबंधन का स्वरूप भले ही बदल गया हो, लेकिन इसकी मूल भावना आज भी उतनी ही पवित्र और प्रासंगिक है। देश भर में इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। यह त्योहार न केवल पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करता है, बल्कि समाज में प्रेम और सद्भाव की भावना को भी बढ़ावा देता है। पाताल लोक से जुड़ी इस पौराणिक कथा का स्मरण हमें यह याद दिलाता है कि हमारे हर रीति-रिवाज के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक और नैतिक संदेश छिपा होता है जिसे हमें संजोकर रखना चाहिए।
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