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रावण दहन उत्सव: जौनपुर में 99 स्थानों पर जलाए गए पुतले

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में इस वर्ष विजय दशमी के पावन पर्व पर बड़े पैमाने पर पुतला दहन का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन और स्थानीय समितियों के सहयोग से कुल 99 स्थानों पर यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस बड़े आयोजन को देखने के लिए भारी संख्या में लोग मैदानों में एकत्र हुए थे।

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Ankit Yadav
22 अक्ट 2026, 12:35
रावण दहन उत्सव: जौनपुर में 99 स्थानों पर जलाए गए पुतले

जौनपुर में 99 स्थानों पर रावण वध

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में इस बार विजय दशमी के पावन पर्व पर कुल 99 स्थानों पर रावण के पुतले का दहन किया गया। इस पारंपरिक और भव्य आयोजन के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। स्थानीय समितियों के कार्यकर्ताओं ने महीनों पहले से ही इन पुतलों को तैयार करने का काम शुरू कर दिया था। कार्यक्रम के दिन शहर के प्रमुख चौराहों और बड़े खेल मैदानों में मेला जैसा माहौल देखने को मिला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस उत्सव में बड़े उत्साह के साथ भाग लिया और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक इस पर्व को मनाया। ग्रामीण इलाकों में भी इस परंपरा को पूरी भव्यता के साथ निभाया गया और हर तरफ मेले जैसा दृश्य नजर आया। पुतलों के निर्माण में स्थानीय कारीगरों ने अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया था और आतिशबाजी का भी खास इंतजाम किया गया था। रात के समय जैसे ही पुतलों में आग लगाई गई, आसमान रोशनी से जगमगा उठा और लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। इस प्रकार जौनपुर जिले में कुल 99 स्थानों पर यह धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया और सभी ने इस संस्कृति का आनंद लिया।

आयोजन की तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था

जौनपुर में हुए इन 99 स्थानों के पुतला दहन कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने पुख्ता इंतजाम किए थे। भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हर एक स्थल पर पुलिस बल के साथ-साथ स्वयंसेवकों को भी तैनात किया गया था ताकि यातायात सुचारू रूप से चलता रहे। समितियों के सदस्यों ने आग से सुरक्षा के लिए दमकल विभाग की गाड़ियों को भी प्रमुख स्थलों पर तैनात रखने का अनुरोध किया था। लोगों ने इन आयोजनों के दौरान पारंपरिक मिठाइयों का आनंद लिया और एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी। बच्चों में खिलौने और गुब्बारे खरीदने को लेकर काफी उत्साह देखा गया जबकि महिलाओं ने मेलों में लगी दुकानों से जमकर खरीदारी की। आयोजकों ने बताया कि इतने बड़े पैमाने पर आयोजन करने के लिए उन्हें महीनों पहले से अनुमति लेनी पड़ी थी और सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य था। प्रशासन की सतर्कता के कारण सभी 99 स्थानों पर कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हो सका। स्थानीय नागरिकों ने भी इस दौरान पूरी जिम्मेदारी का परिचय दिया और अनुशासन बनाए रखा जिससे पुलिस और प्रशासन ने राहत की सांस ली। इस प्रकार जौनपुर का यह पर्व आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया।

विजय दशमी पर्व का सांस्कृतिक महत्व

भारत में विजय दशमी का यह पावन पर्व असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त किया था। इसी ऐतिहासिक विजय की याद में हर वर्ष देश भर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के बड़े-बड़े पुतले बनाकर जलाए जाते हैं। जौनपुर जिले में 99 स्थानों पर हुए इन आयोजनों से न केवल स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है बल्कि लोगों को अपनी प्राचीन संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी प्राप्त होता है। ऐसे मेलों के माध्यम से आपसी सौहार्द और भाईचारे की भावना को भी मजबूती मिलती है क्योंकि सभी धर्मों और समुदायों के लोग इसमें शामिल होते हैं। नई पीढ़ी को अपने इतिहास और परंपराओं से अवगत कराने के लिए इस तरह के सामूहिक आयोजन बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जिला प्रशासन हर साल इन आयोजनों के जरिए सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े मानक तय करता है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। इस बार भी जौनपुर में हुए इन 99 कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया कि लोग अपनी संस्कृति के प्रति कितने समर्पित हैं। आने वाले वर्षों में इन आयोजनों के और अधिक भव्य होने की उम्मीद जताई जा रही है जिससे स्थानीय पर्यटन और संस्कृति को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

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