विजयादशमी का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
विजयादशमी का त्योहार भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इसे अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है। 21 अक्टूबर 2026 को मंत्री गौरव गौतम ने इस पर्व के अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह दिन हमें सदाचार और सत्य के मार्ग का अनुसरण करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विजयादशमी केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह वह दिन है जो हमें याद दिलाता है कि अंततः सत्य की ही जीत होती है। मंत्री ने कहा कि समाज में व्याप्त बुराइयों और नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर के अहंकार को त्यागना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि धर्म के प्रति निष्ठा और सच्चाई का साथ देना ही जीवन का मूल मंत्र है। इस पावन अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों को शुभकामनाएं दीं और समाज में शांति तथा भाईचारे की भावना को बढ़ावा देने का संदेश प्रसारित किया। उन्होंने कहा कि हमें अपने पूर्वजों की परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए आने वाली पीढ़ी को इन मूल्यों के प्रति जागरूक करना चाहिए ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव आ सके।
मंत्री गौरव गौतम द्वारा दिए गए संदेश
मंत्री गौरव गौतम ने अपने संबोधन के दौरान धर्म और सत्य के समन्वय पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विजयादशमी का पर्व समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना का प्रतीक है और यह हमें एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करता है। गौरव गौतम ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना ही इस दिन की सार्थकता है। उन्होंने उल्लेख किया कि जब हम सत्य के पथ पर अडिग रहते हैं, तो कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करना भी सरल हो जाता है। मंत्री के अनुसार, विजयादशमी का संदेश आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक है, जहाँ लोग अक्सर सही और गलत के बीच भ्रमित हो जाते हैं। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक जीवन में धर्म को प्राथमिकता दें और किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्यों से दूर रहें। मंत्री ने यह भी कहा कि सत्य की शक्ति ही वह अस्त्र है जो हर प्रकार के अधर्म का विनाश करने में सक्षम है। उनका संदेश स्पष्ट था कि समाज की प्रगति और समृद्धि के लिए प्रत्येक नागरिक का चरित्रवान होना अनिवार्य है और यह पर्व हमें इसी दिशा में निरंतर प्रयास करने की सीख देता है। उन्होंने सामूहिक रूप से बुराइयों के अंत का संकल्प लेने पर भी बल दिया।
सत्य की विजय और इसका सामाजिक महत्व
पृष्ठभूमि के तौर पर देखें तो विजयादशमी का पर्व भगवान श्री राम द्वारा रावण के विनाश के बाद अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाया जाता है, जो सदियों से हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा रहा है। यह दिन न केवल धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और बुराई के अंत का संकल्प लेने का भी अवसर प्रदान करता है। मंत्री गौरव गौतम द्वारा व्यक्त किए गए विचार इस बात को रेखांकित करते हैं कि धर्म का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन इसका परिणाम हमेशा सुखद और कल्याणकारी होता है। समाज में इस तरह के त्योहारों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि वे हमें हमारे मूल आदर्शों से जोड़े रखते हैं और एक अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। विजयादशमी पर बुराई के पुतलों का दहन इस बात का प्रतीक है कि हमें अपने भीतर के क्रोध, लोभ और अहंकार का भी त्याग करना चाहिए। आने वाले समय में इन मूल्यों का पालन करना ही समाज को प्रगति के पथ पर ले जाने में सहायक सिद्ध होगा। मंत्री के इस संदेश का उद्देश्य जनता को यह स्मरण कराना है कि धर्म ही वह आधार है जिस पर एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है। इस दिन का महत्व केवल परंपराओं के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-सुधार का एक सशक्त माध्यम भी है।