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त्योहारों का मौसम: श्राद्ध, नवरात्रि, करवा चौथ से लेकर दिवाली-छठ तक के सभी व्रत और पर्वों की पूरी सूची
सनातन संस्कृति में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व होता है। साल के इस दौर में आने वाले प्रमुख पर्वों की पूरी सूची सामने आ चुकी है, जिसमें पितृ पक्ष यानी श्राद्ध से लेकर शारदीय नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली और महाछठ तक के सभी महत्वपूर्ण आयोजनों की तिथियां शामिल हैं।
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Ankit Yadav
09 सित 2026, 12:17
सनातन धर्म में पंचांग और व्रत-त्योहारों का सिलसिला बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। जैसे-जैसे साल का यह समय आगे बढ़ता है, एक के बाद एक कई बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व आने लगते हैं। हाल ही में जारी हुई एक नई सूची के अनुसार, आने वाले महीनों में देश भर में उल्लास का माहौल रहने वाला है। इस पूरी श्रृंखला की शुरुआत पितृ पक्ष यानी श्राद्ध अनुष्ठानों से होती है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके निमित्त तर्पण व पिंडदान करते हैं। इसके तुरंत बाद ही मां शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि का आगमन होता है, जो पूरे नौ दिनों तक उत्साह के साथ मनाया जाता है।
प्रमुख त्योहारों की लंबी श्रृंखला
नवरात्रि के समापन के ठीक बाद विजय दशमी यानी दशहरा का पावन पर्व आता है, जो असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। इसके कुछ ही दिनों बाद सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास और कठिन व्रत माने जाने वाला करवा चौथ का त्योहार आता है, जिसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। इस व्रत का इंतजार हर सुहागिन को पूरे साल रहता है। करवा चौथ के बाद रोशनी का सबसे बड़ा पर्व दीपावली आता है, जिसे पूरे देश में दीयों की रोशनी और आतिशबाजी के साथ बड़े पैमाने पर हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। दिवाली के अगले ही दिन गोवर्धन पूजा और भाई दूज का पर्व भी मनाया जाता है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और प्रकृति की पूजा को समर्पित होता है।
लोक आस्था का महापर्व छठ
दीपावली के उत्सव के कुछ ही दिनों बाद लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा का आरंभ होता है। विशेषकर उत्तर भारत और देश के विभिन्न हिस्सों में इस पर्व की छटा देखते ही बनती है। चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत में उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और छठी मईया की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इन तमाम त्योहारों की पूरी श्रृंखला को ध्यान में रखते हुए लोग अभी से अपनी तैयारियों और यात्राओं की योजना बनाने लगे हैं। बाजारों में भी फेस्टिव सीजन को लेकर काफी रौनक देखने को मिलने लगी है, क्योंकि लोग खरीदारी के लिए उत्साहित हैं।
धार्मिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के व्रत और त्योहार हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का काम करते हैं। इन आयोजनों से न केवल सामाजिक समरसता बढ़ती है, बल्कि परिवार के सभी लोग एक साथ मिलकर इन पलों का आनंद लेते हैं। त्योहारों का यह पूरा दौर आने वाले महीनों में हर घर में खुशियां और उत्साह लेकर आने वाला है, जिसकी वजह से लोगों में विशेष रूप से उमंग देखी जा रही है।