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धर्म

पाववन पर्व: प्रधानमंत्री ने देशवासियों को दी जनमाष्टमी की मंगलकामनाएं

देशभर में कृष्ण जन्मोत्सव का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की है।

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Ankit Yadav
04 सित 2026, 17:10
पाववन पर्व: प्रधानमंत्री ने देशवासियों को दी जनमाष्टमी की मंगलकामनाएं
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के इस पावन और पवित्र अवसर पर देश के प्रधानमंत्री ने समस्त देशवासियों को अपनी ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस महान पर्व का सनातन संस्कृति में विशेष और अद्वितीय स्थान है। इस खास दिन पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है और देश के कोने-कोने में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का तांता लगा रहता है। प्रधानमंत्री की ओर से आए इस शुभकामना संदेश ने इस उत्सव के उल्लास को और अधिक बढ़ा दिया है, जिससे आम नागरिकों में खासी खुशी देखने को मिल रही है।

त्योहारों का सांस्कृतिक महत्व

जन्माष्टमी का पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता को भी सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस विशेष अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों में भगवान कृष्ण की लीलाओं को दर्शाती हुई मनमोहक झांकियां सजाई जाती हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत देश के तमाम बड़े शहरों और ग्रामीण अंचलों में मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया है। मध्य रात्रि को जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है, तो पूरा देश 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूंज उठता है। ऐसे समय में देश के सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से मिली शुभकामनाएं उत्सव के माहौल को और अधिक दिव्य और ऊर्जावान बना देती हैं, जिससे हर वर्ग के लोगों में उत्साह की एक नई लहर दौड़ जाती है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण इस धरती पर अन्याय, अधर्म और अत्याचार का नाश करने तथा धर्म की पुनः स्थापना के लिए हुआ था। गीता के माध्यम से उन्होंने निष्काम कर्म का जो संदेश पूरी मानवता को दिया, वह आज के आधुनिक युग में भी उतना ही प्रासंगिक और मार्गदर्शक है। प्रधानमंत्री द्वारा इस अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देना इस बात का प्रतीक है कि हमारे राष्ट्रीय पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को जीवित रखने में कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार के संदेश समाज में सकारात्मकता का संचार करते हैं और लोगों को मिलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। देशभर के शिक्षण संस्थानों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर भी इस पर्व को लेकर विशेष तैयारियां देखने को मिल रही हैं। बच्चे कान्हा और राधा की सुंदर वेशभूषा में सजकर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच भक्तगण मंदिरों में लंबी कतारों में लगकर अपने आराध्य के दर्शन कर रहे हैं और आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की इन मंगलकामनाओं के बाद विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी देश और प्रदेश की जनता को इस पावन पर्व की बधाई दी है, जिससे पूरे राष्ट्र में एक सूत्रता और उत्सव का अद्भुत माहौल बन गया है।
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