नेपाल में बाढ़ : चीन पर उठ रहे सवालों पर क्या कह रहा है अंतरराष्ट्रीय मीडिया
Balen Shah India: भारत ने बाढ़ के महासंकट में निभाई दोस्ती, नेपाली PM बालेन शाह पहले विदेशी दौरे पर आएंगे दिल्ली
Raksha Bandhan 2026 Wishes: बड़े भाई से छोटे भाई तक, हर रिश्ते के लिए भेजें ये खास मैसेज, दिल में घुल जाएगा...
सोनिया गांधी की किताब में क्या है कि पेंगुइन ने छापने से किया इनकार, कौन सा हिस्सा हटाने को कहा
कैलाश मानसरोवर यात्रा का तिब्बत रूट कितना मुश्किल है, रास्ते में क्या चुनौतियां आती हैं?
₹22,000 करोड़ के कर्ज का सिर्फ ₹6.5 करोड़ में निपटारा: NCLT ने सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी;...
अभिजीत दीपके ने अरविंद केजरीवाल को पछाड़ दिया! सर्वे में CJP चीफ ने चौंकाया
CM विजय तय सीट छोड़कर मंत्रियों के बीच बैठे: सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया, तमिलनाडु विधानसभा में ऐसा पह...
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
छात्रों को झटका: अमेरिका में भारतीय अंडरग्रेजुएट दाखिलों में 15 प्रतिशत की गिरावट
अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने की चाह रखने वाले भारतीय युवाओं के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों के अंडरग्रेजुएट (यूजी) दाखिलों में भारी कमी दर्ज की गई है।
A
Ankit Yadav
26 अग 2026, 13:28
पिछले कुछ वर्षों से लगातार अमेरिका को दुनिया भर के विद्यार्थियों के लिए एक प्रमुख शैक्षणिक गंतव्य माना जाता रहा है, विशेष रूप से भारत से हर साल लाखों छात्र अपनी उच्च शिक्षा के सपने को पूरा करने के लिए वहां का रुख करते हैं। हालांकि, हाल ही में आए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में भारतीय छात्रों के अंडरग्रेजुएट यानी यूजी एडमिशन में लगभग पंद्रह प्रतिशत की स्पष्ट गिरावट देखने को मिली है। इस गिरावट ने न केवल शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों को बल्कि उन अभिभावकों और छात्रों को भी चिंता में डाल दिया है जो अपनी उच्च शिक्षा की योजनाएं अमेरिकी संस्थानों के आधार पर तैयार कर रहे थे। इस स्थिति के पीछे विभिन्न प्रकार के आर्थिक, प्रशासनिक और सामाजिक कारण हो सकते हैं, जिनकी गहराई से समीक्षा की जा रही है।
कमी के संभावित कारण और चुनौतियां
इस प्रकार दाखिलों में आई इस अप्रत्याशित कमी के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अमेरिका में लगातार बढ़ती हुई शिक्षण फीस और वहां के जीवन-यापन के महंगे खर्च ने कई मध्यमवर्गीय भारतीय परिवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इसके अलावा, वीजा प्रक्रिया में आने वाली जटिलताएं और अमेरिकी दूतावासों द्वारा अपनाए जाने वाले कड़े नियम भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। कई बार छात्रों को समय पर वीजा न मिलने के कारण अपनी दाखिला प्रक्रिया बीच में ही छोड़नी पड़ती है या फिर वे अन्य देशों के विकल्पों की तलाश करने लगते हैं। इन सभी प्रशासनिक बाधाओं के कारण भारतीय युवाओं का रुझान अब अमेरिका के मुकाबले अन्य यूरोपीय या एशियाई देशों की ओर अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जहां शिक्षा के बेहतर और किफायती अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
भविष्य पर प्रभाव और आगे की राह
अमेरिकी शिक्षण संस्थानों और नीति निर्माताओं के लिए यह गिरावट एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि भारतीय छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था और कैंपस विविधता में एक बहुत बड़ा योगदान देते हैं। यदि दाखिलों का यह नकारात्मक रुझान लंबे समय तक जारी रहता है, तो इससे अमेरिकी विश्वविद्यालयों के अंतरराष्ट्रीय राजस्व और सांस्कृतिक संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, भारतीय छात्रों के लिए यह स्थिति एक नए अवसर की तरह भी उभर रही है, जहां वे वैश्विक स्तर पर अन्य देशों के विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन कर रहे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिकी सरकार और विश्वविद्यालय इस गिरावट को रोकने के लिए कोई विशेष रियायतें या छात्रवृत्तियां प्रदान करते हैं या नहीं, जिससे भारतीय छात्रों का भरोसा फिर से बहाल किया जा सके।