झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतों को लेकर पिछले दो हफ्तों से चल रहा छात्र आंदोलन आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राजधानी रांची में हजारों की संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतरकर लगातार प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे थे। स्थिति की गंभीरता और छात्रों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों के साथ लगभग छह घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने विवादों के घेरे में आई तीन प्रमुख भर्ती परीक्षाओं को आधिकारिक रूप से रद्द करने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले से पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे लाखों परीक्षार्थियों और युवाओं को एक बड़ी सफलता और राहत मिली है।
परीक्षाओं के रद्द होने की घोषणा के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर भी एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। जेपीएससी के तीन प्रमुख सदस्यों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए और पारदर्शी जांच का रास्ता साफ करने के लिए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। अभ्यर्थियों और छात्र यूनियनों का मुख्य आरोप था कि 14वीं जेपीएससी कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा की संपूर्ण प्रक्रिया में गंभीर कमियां थीं और कई केंद्रों पर ओएमआर शीट से छेड़छाड़ की गई थी। छात्रों की मांग थी कि जब तक इन परीक्षाओं को रद्द कर पूरे तंत्र का पुनर्गठन नहीं किया जाता, तब तक निष्पक्ष परीक्षा संभव नहीं है। मोरहाबादी मैदान और विधानसभा मार्ग पर जुटे छात्रों ने सरकार के नए फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग पर भी जोर दिया है।
सुरक्षा व्यवस्था सख्त और आगे का रोडमैप
छात्रों द्वारा बुलाए गए 'विधानसभा मार्च' के आह्वान को देखते हुए रांची पुलिस और जिला प्रशासन ने पूरे शहर में अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध किए थे। विधानसभा परिसर के दो किलोमीटर के दायरे में धारा 144 लागू की गई थी और भारी संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) तथा राज्य पुलिस बल के जवानों को तैनात किया गया था। जगह-जगह लगाए गए वाटर कैनन और बैरिकेड्स के कारण पूरे दिन राजधानी में यातायात प्रभावित रहा।
मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारी छात्रों को संबोधित करते हुए आश्वासन दिया कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी सूरत में खिलवाड़ नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक नई और पारदर्शी परीक्षा नीति तैयार की जाएगी जिसमें आधुनिक तकनीक, बायोमेट्रिक सत्यापन और कड़े सुरक्षा मानकों को अनिवार्य बनाया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयोग के पुनर्गठन और नई प्रणाली के लागू होते ही रद्द की गई परीक्षाओं की नई तिथियां घोषित की जाएंगी, ताकि निष्ठावान अभ्यर्थियों की मेहनत बेकार न जाए।