कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल पुलिस का अलर्ट - तिब्बत की तरफ़ बना डैम टूटा, लोगों से सुरक्षित जगह पर जाने को कहा      Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat LIVE: खत्म हुआ राहुकाल! फिर शुरू हुआ राखी का शुभ मुहूर्त, जानिए कब तक बां      धोखाधड़ी, उत्पीड़न और फिर मर्डर; दिल्ली की मॉडल हत्या मामले में 'जहरीले रिश्ते' का खुलासा      ज़ोहरान ममदानी को लेकर प्रवासी भारतीयों में बहस, आरएसएस ने जारी किया ये बयान      आज लोकसभा चुनाव हुए तो BJP को मिलेंगी कितनी सीटें, इंडिया गठबंधन में शामिल दलों का कैसा हाल, C-वोटर का आया सर्वे      पाकिस्तान ने फंसाया एक और ‘मुर्गा’, सऊदी अरब-तुर्की के बाद इस देश के साथ मिलिट्री डील, बदले में क्या मिलेगा...      रिजिजू ने दिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत, परिसीमन बिल पर टिकीं निगाहें; विपक्ष में हलचल      दिल्ली आ गई 'कांदा एक्सप्रेस', 60-70 रुपये वाला प्याज अब 35 रुपये किलो, जानिए कहां मिलेगा?     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
शिक्षा

कानून विश्वविद्यालय में विरोध: एनएलएसयू बेंगलुरु के दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति पर छात्रों और पूर्व छात्रों की तीखी आपत्ति

बेंगलुरु के प्रतिष्ठित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जहां दीक्षांत समारोह के दौरान मेहमानों की सूची को लेकर छात्रों और पूर्व छात्रों ने नाराजगी जताई है।

X
Kantap News डेस्क
17 अग 2026, 13:53
कानून विश्वविद्यालय में विरोध: एनएलएसयू बेंगलुरु के दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति पर छात्रों और पूर्व छात्रों की तीखी आपत्ति
देश के प्रमुख कानूनी शिक्षण संस्थानों में शुमार बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। संस्थान के आगामी दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाले गणमान्य व्यक्तियों को लेकर विद्यार्थियों के एक बड़े वर्ग में असंतोष व्याप्त हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस प्रतिष्ठित आयोजन में देश के मुख्य न्यायाधीश और बार काउंसिल के शीर्ष पदाधिकारियों की मौजूदगी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। परिसरों में इस प्रकार के विरोध प्रदर्शनों ने शैक्षणिक जगत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां युवा छात्र अपनी संस्था के वैचारिक और नैतिक रुख पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

शैक्षणिक संस्थानों में असंतोष की लहर

विश्वविद्यालय के भीतर पनप रही इस नाराजगी ने प्रशासनिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। छात्रों और पूर्व छात्रों का कहना है कि दीक्षांत समारोह जैसे गरिमामयी अवसरों पर ऐसे प्रतिनिधियों की उपस्थिति उचित नहीं है, जिनकी नीतियों या बयानों पर कानूनी बिरादरी के भीतर ही मतभेद रहे हों। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए आंतरिक स्तर पर बातचीत के प्रयास शुरू कर दिए हैं, लेकिन युवा वकीलों और कानून के छात्रों का रुख अभी भी कड़ा बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया है कि आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों में युवा केवल अपनी पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे राष्ट्रीय मुद्दों पर भी मुखर होकर अपनी राय रखते हैं।

प्रशासन की मुश्किलें और भविष्य की तैयारियां

इस पूरे घटनाक्रम के बीच विश्वविद्यालय के अधिकारियों के सामने दीक्षांत समारोह को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। दूसरी ओर, असंतुष्ट छात्रों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया, तो वे समारोह के दौरान सांकेतिक विरोध दर्ज कराने से पीछे नहीं हटेंगे। शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह के गतिरोध को केवल खुले संवाद और पारदर्शी चर्चा के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है, ताकि संस्थान की गरिमा और छात्रों के अभिव्यक्ति के अधिकारों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज