मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने छात्रों की विभिन्न मांगों और तकनीकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नीट यूजी 2026 के दूसरे दौर के काउंसलिंग शेड्यूल को संशोधित कर दिया है। नए नोटिस के अनुसार, अब छात्र बढ़ी हुई समय सीमा के भीतर अपनी चॉइस लॉकिंग की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं, जिससे सर्वर पर पड़ने वाला अत्यधिक दबाव भी कम हुआ है। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे एम्स (AIIMS) और जिपमेर (JIPMER) में दाखिले की आस लगाए बैठे छात्रों के लिए यह बदलाव बेहद राहत भरा साबित हो रहा है, क्योंकि उन्हें अपने विकल्पों को और अधिक सावधानी से चुनने का पर्याप्त समय मिल गया है।
काउंसलिंग के नियमों में किए गए महत्वपूर्ण बदलाव एमसीसी द्वारा जारी संशोधित निर्देशों के मुताबिक, इस वर्ष सीट अपग्रेडेशन और एग्जिट पॉलिसी के नियमों को और अधिक स्पष्ट कर दिया गया है ताकि किसी भी स्तर पर छात्रों को भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े। यदि कोई छात्र पहले राउंड में आवंटित सीट से संतुष्ट नहीं है और वह अपग्रेडेशन के लिए आवेदन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित समय के भीतर अपनी सहमति दर्ज करानी होगी। देश के कई राज्यों के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने स्तर पर इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें ताकि पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया बिना किसी बाधा के समय पर संपन्न हो सके।
दस्तावेज सत्यापन और कॉलेज रिपोर्टिंग प्रक्रिया काउंसलिंग के इस चरण में सफल होने वाले उम्मीदवारों को अपने सभी मूल दस्तावेजों के साथ निर्धारित समय सीमा के भीतर आवंटित मेडिकल कॉलेज में रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की त्रुटि पाए जाने पर प्रवेश रद्द किया जा सकता है, इसलिए एमसीसी ने सभी छात्रों को सलाह दी है कि वे अपने प्रमाण पत्र और पहचान पत्र पहले से ही तैयार रखें। इस साल डिजिटल वेरीफिकेशन की सुविधा को भी और अधिक मजबूत किया गया है ताकि दूर-दराज के इलाकों से आने वाले छात्रों को लंबी कतारों में खड़े होने से बचाया जा सके और प्रक्रिया को पूरी तरह से सुगम बनाया जा सके।