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परीक्षा लीक पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश: डीवाई चंद्रचूड़ बोले, युवा पीढ़ी की चिंताओं को समझना और हल निकालना अत्यंत आवश्यक

मुंबई में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता जताई और युवाओं के सपनों को सुरक्षित करने की वकालत की।

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Ankit Yadav
20 अग 2026, 11:32
परीक्षा लीक पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश: डीवाई चंद्रचूड़ बोले, युवा पीढ़ी की चिंताओं को समझना और हल निकालना अत्यंत आवश्यक
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान सामने आने वाले प्रश्न पत्र लीक मामलों पर अपनी गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने एक बार फिर युवाओं के भविष्य का मुद्दा उठाया है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल प्रशासनिक विफलता नहीं हैं बल्कि यह लाखों मेधावी युवाओं की उम्मीदों पर बहुत बड़ा आघात करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यवस्थापकों को यह समझना होगा कि एक साधारण मध्यवर्गीय परिवार के लिए अपने बच्चे को किसी अच्छे पेशेवर पाठ्यक्रम या प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिल कराना कितना बड़ा सपना होता है। जब परीक्षा प्रणाली में सेंध लगती है, तो उस परिवार का वह सपना चकनाचूर हो जाता है, और इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए हमें इन समस्याओं के ठोस और स्थायी समाधान खोजने होंगे।

मध्यवर्गीय सपनों की सुरक्षा और न्याय

न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर लंबे समय तक सेवा दे चुके न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने इस बात पर बल दिया कि युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं का सम्मान करना और उनकी चिंताओं के प्रति जवाबदेह होना शासन प्रणाली का प्राथमिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में शिक्षा और सरकारी नौकरियां ही सामाजिक गतिशीलता का सबसे बड़ा माध्यम हैं। यदि युवा वर्ग का इन चयन प्रक्रियाओं से भरोसा उठने लगे, तो यह राष्ट्र की बौद्धिक संपदा और सामाजिक ताने-बाने के लिए एक खतरनाक संकेत साबित हो सकता है। इसलिए परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को अपनी कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता लानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ इतने कड़े कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

भविष्य के लिए सख्त नीतिगत सुधार

पूर्व मुख्य न्यायाधीश के इन बयानों ने एक बार फिर देश के शिक्षा जगत और नीति निर्माताओं के बीच बहस छेड़ दी है कि कैसे परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए। आज के डिजिटल युग में जहां एक तरफ तकनीक से प्रक्रिया को सुगम बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराध और पेपर लीक करने वाले गिरोह भी अधिक उन्नत तरीके अपना रहे हैं। इसके खिलाफ तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ कानूनी शिकंजा भी उतना ही मजबूत होना जरूरी है। देश के बुद्धिजीवियों और छात्रों ने उनके इस बयान का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे सरकारों और परीक्षा बोर्डों पर सुधार के लिए और अधिक दबाव बनेगा, जिससे आने वाले समय में छात्रों के श्रम और मेधा का सही मूल्यांकन सुरक्षित हो सकेगा।
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