रांची यूनिवर्सिटी में दाखिले की प्रक्रिया
झारखंड की राजधानी रांची में स्थित इन दोनों शिक्षण संस्थानों के बीच की दूरी महज एक किलोमीटर की है। इसके बावजूद इनके दाखिला लेने के तौर-तरीकों में साफ अंतर देखा जा सकता है। वर्तमान में रांची यूनिवर्सिटी की तरफ से उनतीस विभिन्न विषयों के अंतर्गत कुल तीन सौ इकतीस सीटों पर उम्मीदवारों के चयन की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। इन निर्धारित सीटों के वास्ते इंटरव्यू का कार्यक्रम बाईस अक्टूबर से चौबीस अक्टूबर तक तय किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक प्रबंध पहले ही पूरे किए जा चुके हैं और कई विषयों के विशेषज्ञ बाहर से आकर रांची पहुंच चुके हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से इस पूरी प्रक्रिया में भाग लेने वाले किसी भी अभ्यर्थी से किसी प्रकार का शुल्क नहीं वसूला जा रहा है। इसके विपरीत, बाहर से आने वाले इन सभी बाहरी विषय विशेषज्ञों के वास्ते प्रतिदिन पांच हजार रुपये का मानदेय देने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।
डीएसपीएमयू में आवेदन और शुल्क का ब्योरा
दूसरी तरफ, डॉ। श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी में सोलह विभिन्न विषयों की कुल अड़तालीस सीटों के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन पदों पर फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि पच्चीस अक्टूबर निर्धारित की गई है। इस संस्थान में प्रत्येक आवेदक को फॉर्म भरने के एवज में छह सौ रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। सभी प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच यानी स्क्रूटिनी पूरी होने के बाद ही साक्षात्कार की सही तिथि का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा। दोनों ही विश्वविद्यालयों में अंतिम रूप से चयन करने के लिए कुल अंक एक जैसे रखे गए हैं, जिसमें सत्तर अंक शैक्षणिक स्कोर और तीस अंक साक्षात्कार के लिए तय किए गए हैं। हालांकि, इन अंकों की गणना करने की पद्धति दोनों जगह पर पूरी तरह भिन्न है। रांची यूनिवर्सिटी में रिसर्च क्वालिफाइंग परीक्षा के अंदर मिले अंकों को मुख्य आधार बनाया जा रहा है। जबकि डॉ। श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी में मैट्रिक से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के सभी अंकों के साथ नेट, जेआरएफ और पीएचडी हासिल करने की योग्यताओं को जोड़कर अंक तय किए जा रहे हैं।
यूजीसी रेगुलेशन और लोकभवन के निर्देश
देशभर के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा की व्यवस्था को सुचारू और स्पष्ट बनाने के लिए नियमों में एकरूपता लाने का बड़ा उद्देश्य तय किया गया है। लोकभवन की तरफ से कुलपतियों की विभिन्न बैठकों के दौरान इस बारे में कई बार कड़े निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। पूर्व काल में पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए वसूला जाने वाला शुल्क भी सभी जगहों पर अलग-अलग हुआ करता था। बाद में लोकभवन के सीधे हस्तक्षेप के कारण ही सभी विश्वविद्यालयों के लिए इसे समान रूप से दो हजार रुपये तय किया गया था। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के वर्ष 2022 के विनियमों के मुताबिक, प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होने वाले चयन में परीक्षा के अंक सत्तर प्रतिशत और साक्षात्कार के अंक तीस प्रतिशत माने जाते हैं। इसी प्रकार, राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा की श्रेणी दो और श्रेणी तीन के विद्यार्थियों के मामले में भी यही पैमाना लागू होता है। जब दोनों शैक्षणिक संस्थान एक ही केंद्रीय नियम के तहत प्रवेश दे रहे हैं, तब इस प्रकार की भिन्नताएं व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं।