परीक्षा केंद्र आवंटन में बड़ी दूरी की समस्या
गोरखपुर के सैकड़ों परीक्षार्थियों के लिए प्रारंभिक अर्हता परीक्षा यानी पीईटी का आयोजन इस बार बड़ी मुसीबत बन गया है। परीक्षा में शामिल होने के लिए गोरखपुर से जिन उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, उन्हें परीक्षा केंद्र के रूप में 510 किलोमीटर दूर शहर आवंटित किया गया है। इतनी लंबी दूरी की यात्रा करना किसी भी छात्र के लिए एक बड़ी चुनौती है। परीक्षा की तैयारी में जुटे युवा अब केंद्रों के आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। नौकरी पाने की पहली सीढ़ी मानी जाने वाली यह परीक्षा अब उम्मीदवारों के लिए शारीरिक और मानसिक थकान का कारण बन गई है। 22 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस जानकारी से स्पष्ट है कि प्रशासन की ओर से परीक्षा केंद्रों के चयन में छात्रों की सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा गया है। इतनी दूर यात्रा करने के लिए न केवल अतिरिक्त धन की आवश्यकता होगी, बल्कि समय का प्रबंधन करना भी गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों के लिए कठिन साबित हो रहा है। अधिकांश छात्र अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि वे इतनी लंबी दूरी तय करके समय पर परीक्षा केंद्र तक कैसे पहुंच पाएंगे।
छात्रों की परेशानी और प्रशासनिक अव्यवस्था
परीक्षा केंद्र आवंटन की इस प्रक्रिया ने व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। पीईटी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में भाग लेने के लिए जब गोरखपुर के छात्रों को 510 किलोमीटर दूर भेजा जाता है, तो इससे उनकी तैयारी पर सीधा असर पड़ता है। लंबी दूरी की यात्रा का मतलब है कि छात्रों को एक या दो दिन पहले ही अपने गंतव्य के लिए निकलना होगा, जिससे उनकी पढ़ाई का कीमती समय बर्बाद हो रहा है। प्रशासन द्वारा केंद्रों का निर्धारण करते समय उम्मीदवारों की भौगोलिक स्थिति को नजरअंदाज करना एक बड़ी प्रशासनिक विफलता के रूप में देखा जा रहा है। कई छात्र ऐसे भी हैं जो आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि वे इतनी लंबी दूरी की यात्रा का खर्च उठा सकें। परिवहन के साधनों की उपलब्धता और होटलों में रुकने की व्यवस्था भी एक अलग समस्या बनी हुई है। सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर अभ्यर्थी लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि परीक्षा केंद्र उनके निवास स्थान के आसपास ही होने चाहिए थे। पीईटी की पात्रता हासिल करना युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का द्वार खोलने जैसा है, लेकिन केंद्र की दूरी ने इस प्रक्रिया को ही एक इम्तिहान में बदल दिया है।
पीईटी का महत्व और भविष्य की चुनौतियां
प्रारंभिक अर्हता परीक्षा यानी पीईटी उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों के लिए एक अनिवार्य प्रक्रिया है। इस परीक्षा के माध्यम से ही उम्मीदवार मुख्य परीक्षाओं में बैठने के लिए अपनी योग्यता सिद्ध करते हैं। जब परीक्षा की पहली सीढ़ी पर ही छात्रों को इतनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो यह पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और कार्यकुशलता पर सवाल खड़े करता है। गोरखपुर जैसे बड़े जिलों से छात्रों को इतनी दूर भेजना यह दर्शाता है कि संबंधित विभाग ने परीक्षा केंद्रों की क्षमता और छात्रों की संख्या का सही आकलन नहीं किया है। भविष्य में इस प्रकार की अव्यवस्था को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों का आवंटन जिलेवार करने की आवश्यकता है। शिक्षा जगत के जानकार मानते हैं कि अगर छात्रों को परीक्षा देने के लिए भी 510 किलोमीटर का सफर करना पड़े, तो वे परीक्षा के दौरान मानसिक रूप से तरोताजा नहीं रह पाएंगे। यह स्थिति न केवल छात्रों के मनोबल को तोड़ती है, बल्कि प्रतिस्पर्धा के माहौल में असमानता भी पैदा करती है। आने वाले समय में बोर्ड को इस बात पर विचार करना होगा कि परीक्षा केंद्रों का निर्धारण करते समय उम्मीदवारों की सुविधा को पहली प्राथमिकता दी जाए ताकि परीक्षा एक सुगम प्रक्रिया बनी रहे।