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शिक्षा

सार्वजनिक भाषण कला: रोम्बस वर्ल्ड स्कूल के बच्चों ने सीखी बोलने की नई तकनीकें

मेरठ के रोम्बस वर्ल्ड स्कूल में हाल ही में एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जहाँ बच्चों ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने और भाषण कला की बारीकियों को सीखा।

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Ankit Yadav
25 अग 2026, 17:50
सार्वजनिक भाषण कला: रोम्बस वर्ल्ड स्कूल के बच्चों ने सीखी बोलने की नई तकनीकें
मेरठ शहर के प्रतिष्ठित रोम्बस वर्ल्ड स्कूल में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक गतिविधि का मुख्य उद्देश्य छात्रों के भीतर से मंच का डर दूर करना और उन्हें एक प्रभावी वक्ता के रूप में तैयार करना था। आज के आधुनिक दौर में केवल किताबी ज्ञान होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने विचारों को प्रभावशाली ढंग से दूसरों के सामने प्रस्तुत करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्कूल प्रबंधन द्वारा यह सराहनीय पहल की गई, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और विभिन्न सत्रों के माध्यम से संवाद कौशल के गुर सीखे।

सवांद और भाषण कला का महत्व

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षकों ने बच्चों को यह सिखाया कि किस प्रकार किसी भी विषय पर अपने विचार स्पष्टता के साथ रखे जा सकते हैं। मंच पर खड़े होकर बिना किसी झिझक के अपनी बात रखना, सही हाव-भाव का उपयोग करना और श्रोताओं से संवाद स्थापित करना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। स्कूल के शिक्षकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों के आत्मविश्वास में भारी वृद्धि होती है। जब छात्र छोटी उम्र से ही इस प्रकार के प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, तो वे भविष्य में हर क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए तैयार हो जाते हैं। बच्चों को यह भी बताया गया कि एक अच्छा वक्ता बनने के लिए एक अच्छा श्रोता होना कितना जरूरी है, क्योंकि दूसरों को सुनकर ही वे अपनी बात को बेहतर तरीके से रखना सीख सकते हैं। इस कार्यशाला में विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों के जरिए व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। उन्हें छोटे-छोटे विषयों पर बोलने का अवसर दिया गया ताकि उनकी झिझक पूरी तरह से समाप्त हो सके। शिक्षकों और स्कूल के वरिष्ठ अधिकारियों ने बच्चों का मार्गदर्शन किया और उनकी प्रस्तुति की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया। अभिभावकों ने भी स्कूल की इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी इस तरह के रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल बच्चों की बौद्धिक क्षमता का विकास होता है, बल्कि उनके व्यक्तित्व को भी एक नई दिशा मिलती है जो उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद आवश्यक है।
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