देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने आज सभी केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों के लिए 'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' (ABC) प्रणाली को सख्ती से लागू करने का नया निर्देश जारी किया है। इसके तहत अब देश का कोई भी छात्र अपनी पंसद के अनुसार किसी एक संस्थान से पढ़ाई बीच में छोड़कर दूसरे संस्थान में अपनी शिक्षा को बिना किसी नुकसान के जारी रख पाएगा। प्रत्येक छात्र का एक डिजिटल अकादमिक बैंक खाता होगा, जिसमें उसके द्वारा अर्जित किए गए क्रेडिट सुरक्षित रूप से जमा रहेंगे। यह कदम विद्यार्थियों को बहु-विषयक अध्ययन (Multi-disciplinary study) की पूरी स्वतंत्रता प्रदान करेगा।
छात्रों को मिलेगी पढ़ाई बीच में छोड़ने और दोबारा शुरू करने की छूट इस प्रणाली के शुरू होने से 'मल्टीपल एंट्री और एग्जिट' (Multiple Entry and Exit) का विकल्प वास्तविक रूप से धरातल पर उतर आया है। यदि कोई छात्र एक वर्ष की पढ़ाई के बाद किसी कारणवश कोर्स छोड़ देता है, तो उसे सर्टिफिकेट मिलेगा; दो साल बाद छोड़ने पर डिप्लोमा और तीन-चार साल पूरे होने पर डिग्री प्रदान की जाएगी। यदि छात्र भविष्य में अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू करना चाहेगा, तो उसके पहले से अर्जित क्रेडिट स्वतः ही नए पाठ्यक्रम में जुड़ जाएंगे। शिक्षाविदों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि इससे ड्रॉपआउट दरों में कमी आएगी और शिक्षा अधिक लचीली बनेगी।
डिजिटल बुनियादी ढांचे को किया गया मजबूत यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि सभी विश्वविद्यालयों को अपने परिसरों में इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के अनुकूल तकनीकी बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। इसके लिए देश के सभी बड़े विश्वविद्यालयों को विशेष अनुदान भी प्रदान किया गया है। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि इस सुधार से भारतीय उच्च शिक्षा वैश्विक मानकों के अनुरूप बनेगी और हमारे छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आसानी से क्रेडिट ट्रांसफर का लाभ उठा सकेंगे, जिससे उनका कौशल विकास और अधिक प्रभावी होगा।