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शिक्षा का नया क्षितिज: केरल के सभी विश्वविद्यालयों में अब छात्रों के लिए मातृभाषा में होगी तकनीकी शिक्षा

केरल सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लेते हुए राज्य के सभी तकनीकी और इंजीनियरिंग संस्थानों में मलयालम भाषा में पठन-पाठन और परीक्षाओं को अनिवार्य बना दिया है।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 14:00
शिक्षा का नया क्षितिज: केरल के सभी विश्वविद्यालयों में अब छात्रों के लिए मातृभाषा में होगी तकनीकी शिक्षा
केरल उच्च शिक्षा परिषद ने आज एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए आधिकारिक आदेश जारी किया है जिसके तहत राज्य के सभी इंजीनियरिंग और तकनीकी विश्वविद्यालयों में छात्रों को उनकी अपनी मातृभाषा यानी मलयालम में पाठ्यक्रम सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य उन प्रतिभाशाली छात्रों को सशक्त बनाना है जो अंग्रेजी भाषा की बाधा के कारण तकनीकी शिक्षा में पिछड़ जाते थे या अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन नहीं कर पाते थे। राज्य के शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि शीर्ष तकनीकी संस्थानों के प्रोफेसरों और विषय विशेषज्ञों की एक विशेष समिति ने पिछले दो वर्षों में कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के मानक ग्रंथों का मलयालम में उच्च कोटि का अनुवाद तैयार किया है। इन पुस्तकों में आधुनिक तकनीकी शब्दावली को अंग्रेजी के साथ समायोजित किया गया है ताकि छात्रों को वैश्विक स्तर पर काम करने में भी कोई असुविधा न हो।

छात्रों के मानसिक विकास और समझ पर प्रभाव

शिक्षाविदों और मनोवैज्ञानिकों ने सरकार के इस कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा है कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से छात्रों की वैचारिक स्पष्टता और रचनात्मकता में भारी वृद्धि होती है। जब छात्र अपनी घरेलू भाषा में जटिल गणितीय और वैज्ञानिक सिद्धांतों को सीखते हैं, तो उनका आत्मविश्वास स्वाभाविक रूप से कई गुना बढ़ जाता है। इस योजना के तहत राज्य के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में विशेष भाषा प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं जहाँ छात्रों को तकनीकी मलयालम लिखने और बोलने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, जो छात्र अंग्रेजी या अन्य भाषाओं में पढ़ना जारी रखना चाहते हैं, उनके लिए भी पूर्व की तरह विकल्प खुले रखे गए हैं, जिससे किसी भी प्रकार की बाध्यता की स्थिति पैदा न हो।

रोजगार के नए रास्ते और भविष्य की दिशा

इस नीति के लागू होने से न केवल स्थानीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा अधिक समावेशी बनेगी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और मेधावी छात्रों के लिए भी इंजीनियरिंग के दरवाजे आसानी से खुल जाएंगे। विभिन्न तकनीकी कंपनियों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि वे ऐसी प्रणालियों को विकसित करने में सहयोग देंगी जो क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध तकनीकी डेटा को आसानी से समझ सकें। केरल सरकार का यह दूरदर्शी निर्णय देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण पेश कर रहा है, जो समावेशी शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव का एक बेहतरीन प्रतीक बन गया है।
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