केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आज एक नई शैक्षिक घोषणा करते हुए बताया कि अब कक्षा 3 से कक्षा 5 तक के सभी सरकारी और निजी प्राथमिक विद्यालयों में कोडिंग अनिवार्य होगी। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को शुरुआती उम्र से ही तार्किक सोच और तकनीकी कौशल के साथ तैयार करना है। सरकार ने इसके लिए एक विशेष पाठ्यक्रम भी तैयार किया है जिसे अगले शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा। शिक्षकों को भी इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे छात्रों को सरलता से कोडिंग सिखा सकें।
डिजिटल साक्षरता पर जोर
इस नीति के पीछे का मुख्य तर्क 21वीं सदी की जरूरतों को पूरा करना है। डिजिटल युग में तकनीक का ज्ञान अनिवार्य हो गया है और भारत को 'डिजिटल ग्लोबल हब' बनाने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोडिंग केवल कंप्यूटर प्रोग्रामिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समस्या समाधान की क्षमता को भी विकसित करती है। अभिभावकों ने भी सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे बच्चों के भविष्य के लिए एक उज्ज्वल कदम बताया है।
पाठ्यक्रम और कार्यान्वयन
पाठ्यक्रम में स्क्रैच और पायथन के शुरुआती स्तर शामिल होंगे जो बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने के अनुकूल होंगे। सरकार ने स्कूलों को आवश्यक हार्डवेयर और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का भी वादा किया है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों के लिए विशेष 'लैब ऑन व्हील्स' योजना भी शुरू की जा रही है ताकि वहां के छात्र भी पीछे न रहें। यह परिवर्तन शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाएगा।