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शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: बिहार के एक ही कमरे में पढ़ते मिले पांच कक्षाओं के छात्र

बिहार के एक स्कूल की दयनीय स्थिति सामने आई है, जहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पांच अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में एक साथ पढ़ाया जा रहा है।

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Ankit Yadav
26 अग 2026, 13:21
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: बिहार के एक ही कमरे में पढ़ते मिले पांच कक्षाओं के छात्र
बिहार के शिक्षा ढांचे की पोल खोलने वाला एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने राज्य के स्कूलों में फैली बदहाली और लचर प्रशासनिक व्यवस्था को उजागर कर दिया है। सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से सामने आई एक तस्वीर ने सबका ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें एक ही कमरे के भीतर कुल पांच अलग-अलग कक्षाओं के छात्र पढ़ाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस अनोखी और चिंताजनक स्थिति ने सरकारी दावों की हवा निकाल दी है, जिसमें हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और उचित माहौल में शिक्षा देने की बात कही जाती है।

बुनियादी ढांचे की भारी कमी और अधिकारियों की उदासीनता

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विद्यालय में कक्षाओं के संचालन के लिए पर्याप्त कमरों का घोर अभाव है, जिसके कारण शिक्षकों और छात्रों के समक्ष विकट परिस्थिति उत्पन्न हो गई है। जब पांच अलग-अलग स्तर के बच्चों को एक ही छत के नीचे एक साथ बिठाकर पढ़ाया जाएगा, तो पढ़ाई की गुणवत्ता और अनुशासन पर इसका क्या असर पड़ेगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। एक तरफ जहां देश और राज्य स्तर पर शिक्षा के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के दावे किए जा रहे हैं, वहीं धरातल पर कई जगहों पर बच्चे बुनियादी कमरों जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं।

अभिभावकों में भारी रोष और प्रशासनिक सुधार की मांग

इस प्रकार की तस्वीरें सामने आने के बाद स्थानीय अभिभावकों और शिक्षाविदों के बीच गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि यदि स्कूलों की ऐसी ही हालत बनी रही, तो नौनिहालों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। स्थानीय नागरिकों ने इस मामले में उच्च अधिकारियों से त्वरित संज्ञान लेने और दोषी जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, विद्यालय भवन के विस्तार और कमरों के निर्माण की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया गया है ताकि बच्चों को बेहतर माहौल मिल सके। उम्मीद की जा रही है कि इस मामले के तूल पकड़ने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आएगा और राज्य के अन्य ग्रामीण तथा दूरदराज के विद्यालयों का भी औचक निरीक्षण कर उनकी वास्तविक स्थिति का जायजा लेगा। बुनियादी ढांचे में सुधार किए बिना शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना असंभव है, और ऐसे मामलों से यह साबित होता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने की सख्त आवश्यकता है।
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