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ईंधन कीमतों पर सियासत: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा उपकर बढ़ाने पर विपक्षी दलों ने घेरा

हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर साठ पैसे का अतिरिक्त उपकर लगाए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 15:26
ईंधन कीमतों पर सियासत: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा उपकर बढ़ाने पर विपक्षी दलों ने घेरा
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में ईंधन की कीमतों पर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है जब वहां की कांग्रेस सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर साठ पैसे प्रति लीटर का अतिरिक्त उपकर लगाने का निर्णय लिया। इस कदम के सामने आते ही विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का खुला मौका मिल गया है, और उन्होंने इसे आम जनता की जेब पर एक और भारी बोझ करार दिया है। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तीखा तंज कसते हुए आरोप लगाया है कि जब चुनाव होते हैं तो महंगाई कम करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस तरह के कर लगाकर जनता का आर्थिक शोषण किया जाता है, जो उनकी कथनी और करनी के अंतर को स्पष्ट करता है।

सरकार का बचाव और वित्तीय मजबूरियां

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अपने इस फैसले का जोरदार बचाव करते हुए कहा है कि वित्तीय संकट से जूझ रहे पहाड़ी राज्य के विकास कार्यों को गति देने के लिए यह मामूली उपकर लगाना बेहद आवश्यक था। अधिकारियों का तर्क है कि इस अतिरिक्त राजस्व से मिलने वाली राशि का उपयोग राज्य के बुनियादी ढांचे को सुधारने और जनहित योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए किया जाएगा। सरकार का यह भी कहना है कि अन्य पड़ोसी राज्यों की तुलना में उनके यहां अभी भी कीमतें नियंत्रण में हैं और इस फैसले का असर आम उपभोक्ताओं पर बहुत सीमित रहेगा, हालांकि विपक्ष इस दलील को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है।

आम जनता पर पड़ने वाला सीधा असर

महंगाई के इस दौर में ईंधन के दामों में मामूली सी बढ़ोतरी भी परिवहन क्षेत्र और रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं की ढुलाई को महंगा कर देती है, जिससे अंततः आम आदमी की थाली पर असर पड़ता है। हिमाचल जैसे राज्य में, जहां परिवहन का मुख्य साधन सड़क मार्ग ही है, डीजल और पेट्रोल के महंगे होने से बस किराए और कृषि उत्पादों की ढुलाई लागत में भी वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है। जनता के बीच भी इस बात को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि क्या इस फैसले से राज्य की वित्तीय सेहत सुधरेगी या फिर यह केवल राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का एक नया दौर बनकर रह जाएगा।
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