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वित्तीय संकट: पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया लोन लेने को मजबूर है हिमाचल, सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू का जयराम ठाकुर पर बड़ा हमला

हिमाचल प्रदेश में इन दिनों राजनीतिक बयानबाजी काफी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य को पुराने कर्जों की अदायगी के लिए नए लोन लेने पड़ रहे हैं।

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Ankit Yadav
03 सित 2026, 16:34
वित्तीय संकट: पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया लोन लेने को मजबूर है हिमाचल, सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू का जयराम ठाकुर पर बड़ा हमला
हिमाचल प्रदेश की सियासत में वित्तीय प्रबंधन और कर्ज के मुद्दे पर एक बार फिर से भारी घमासान छिड़ गया है। राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश की पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी सरकार पर गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगाए हैं। सीएम सुक्खू का कहना है कि पिछली सरकारों के गलत आर्थिक फैसलों और अंधाधुंध उधार लेने की प्रवृत्ति के कारण आज वर्तमान सरकार को अत्यंत दयनीय वित्तीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि राज्य के खजाने से पुराने ऋणों और उनके ब्याजों का भुगतान करने के लिए नए सिरे से कर्ज लेने की मजबूरी बन गई है।

वित्तीय हालात पर सियासी घमासान

मुख्यमंत्री ने विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर को सीधे तौर पर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान आर्थिक अनुशासन को पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया था। मनमाने तरीके से लिए गए कर्जों और चुनावी फायदों के लिए खजाने पर डाले गए अतिरिक्त बोझ का नतीजा यह है कि आज हिमाचल प्रदेश का हर नागरिक भारी वित्तीय संकट के साए में जीने को मजबूर है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि पिछली सरकार ने सूझबूझ और जिम्मेदारी के साथ वित्तीय नीतियां बनाई होतीं, तो आज पहाड़ी राज्य को अपनी पुरानी देनदारियों को चुकता करने के लिए नए ऋणों के जाल में नहीं फंसना पड़ता।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और भविष्य की चुनौतियां

दूसरी ओर, इस तीखे राजनीतिक हमले के बाद विपक्षी खेमे में भी खलबली मच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर लगातार राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करते रहे हैं। भाजपा का यह तर्क रहा है कि मौजूदा सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं और गारमी को पूरा करने में आ रही नाकामियों को छिपाने के लिए केवल पूर्ववर्ती सरकार पर आधारहीन आरोप मढ़ रही है। हालांकि, आर्थिक जानकारों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी और सीमित संसाधनों वाले राज्य के लिए बढ़ता हुआ राजकोषीय घाटा और भारी-भरकम कर्ज का बोझ आने वाले समय में एक गंभीर चुनौती साबित हो सकता है। राज्य सरकार के सामने अब सबसे बड़ा संकट यह है कि वह विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ अपने पुराने कर्ज के जाल से कैसे बाहर निकले। मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार वित्तीय सुधारों की दिशा में कड़े कदम उठा रही है और अनावश्यक खर्चों पर लगाम कसी जा रही है ताकि भविष्य में राज्य को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर भी इस मुद्दे पर और अधिक राजनीतिक गर्मागरमी देखने को मिल सकती है, क्योंकि दोनों दल जनता के बीच अपनी-अपनी आर्थिक नीतियों को सही साबित करने में जुटे हुए हैं।
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