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स्वास्थ्य

आंदोलन समाप्त: लखनऊ में सहमति के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने संभाला कामकाज

लखनऊ के इको गार्डन में पिछले एक महीने से चल रहा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का अनिश्चितकालीन धरना अब समाप्त हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक में मांगों पर सहमति बनने के बाद ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सेवाएं फिर से बहाल हो गई हैं। सभी अधिकारी अपने कार्यस्थलों पर लौटकर जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

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Ankit Yadav
30 अक्ट 2026, 12:39
आंदोलन समाप्त: लखनऊ में सहमति के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने संभाला कामकाज

लखनऊ में बनी सहमति से खत्म हुआ धरना

सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में पिछले एक महीने से अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन चल रहा था। स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों और सीएचओ संगठन के प्रमुख नुमाइंदों के बीच हुई लंबी बातचीत के बाद इस आंदोलन को समाप्त करने का बड़ा फैसला लिया गया। संयुक्त मोर्चा सीएचओ संगठन के जिला अध्यक्ष धीरेंद्र मणि त्रिपाठी और महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष शारदा रावत ने दोनों की ओर से संयुक्त रूप से इस बात की पुष्टि की है। अधिकारियों के इस प्रकार आंदोलन समाप्त करने और काम पर लौटने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से पटरी पर लौट चुकी हैं। देश के इस हिस्से में गांवों के अंदर स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटकने या सेवाएं ठप रहने की समस्या से जूझ रहे आम मरीजों को अब खासी राहत मिल गई है। सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने वीरवार से अपने अपने कार्यस्थलों पर पहुंचकर अपनी जिम्मेदारियों को संभाल लिया है। इस तरह प्रशासनिक स्तर पर हुई सार्थक वार्ता के बाद महीनों से चला आ रहा गतिरोध आखिरकार पूरी तरह से समाप्त हो गया है।

वेतन समायोजन और प्रोत्साहन राशि पर बड़ा फैसला

शासन स्तर पर हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में कर्मचारियों के वेतन ढांचे और प्रोत्साहन राशि से जुड़े तमाम अहम मुद्दों पर आपसी सहमति बन गई है। तय किए गए नए प्रावधानों के तहत कर्मचारियों के मौजूदा वेतन में पांच हजार रुपये की राशि जोड़ी जाएगी। इसके साथ ही प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि यानी पीबीआई के रूप में मिलने वाले दस हजार रुपये में से दो हजार रुपये सीधे वेतन में समायोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त सभी संबंधित कर्मियों को तीन हजार रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि दिए जाने का भी औपचारिक निर्णय लिया गया है। भविष्य के लिए यह भी तय किया गया है कि कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि के रूप में निर्धारित संकेतकों के आधार पर पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। साथ ही बत्तीस हजार पांच सौ रुपये के मूल वेतन पर वार्षिक वृद्धि देने और अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान करने पर भी सहमति बन गई है। इन वित्तीय फायदों के ऐलान के बाद से आंदोलन में शामिल रहे सभी सीएचओ और उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। वेतन और भत्तों से जुड़े इन नए संशोधनों को कर्मचारियों के हित में एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

अनुपस्थिति अवधि के अवकाश और भविष्य की व्यवस्था

आंदोलन की पूरी अवधि के दौरान अपने कार्यस्थलों से अनुपस्थित रहने वाले किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस बात की पुख्ता जानकारी संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों द्वारा दी गई है जिससे धरने में शामिल कर्मियों को बहुत बड़ी राहत मिली है। इस पूरी अवधि को आकस्मिक अवकाश, चिकित्सीय अवकाश और विशेष अवकाश के रूप में वैध रूप से अनुमन्य करने के लिए मिशन निदेशक की तरफ से एक आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया गया है। पत्र जारी होने के बाद कर्मचारियों में किसी भी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई का डर पूरी तरह से समाप्त हो गया है। ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए अब सभी कर्मचारी अपनी नियमित ड्यूटियों पर मुस्तैद हो गए हैं। पिछले एक महीने तक चले इस लंबे संघर्ष के दौरान सेवाएं बाधित होने से ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। अब जबकि शासन और संगठन के बीच सभी विवादित बिंदुओं का शांतिपूर्ण हल निकल आया है तो चिकित्सा सेवाएं पूरी क्षमता के साथ संचालित होने लगी हैं। इस समझौते ने न केवल कर्मचारियों की मांगों को पूरा किया है बल्कि ग्रामीण भारत के स्वास्थ्य तंत्र को भी एक बार फिर से गति प्रदान कर दी है।

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