वेयरहाउस के पास मिट्टी में दबी मिलीं कोविड काल की सामग्री
बिहार राज्य के समस्तीपुर जिले के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की एक बहुत बड़ी लापरवाही का मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जब इस मामले की पूरी पड़ताल की गई तो एक निर्माणाधीन वेयरहाउस के पास जमीन के अंदर मिट्टी में दबी हुई पीपीई किट बरामद हुईं। यह सभी पीपीई किट कोविड काल के दौरान आपूर्ति की गई थीं और इनका उपयोग महामारी के समय होना था। लेकिन इन महत्वपूर्ण चिकित्सा किटों का नियमानुसार सुरक्षित निस्तारण करने के बजाय इन्हें जमीन में ही दबा दिया गया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इन सभी पीपीई किटों की एक्सपायरी डेट साल 2025 में ही पूरी तरह से खत्म हो चुकी थी। इतनी भारी मात्रा में जीवन रक्षक किटों को इस तरह से खुलेआम मिट्टी के भीतर छिपाए जाने से पूरे स्वास्थ्य विभाग के अंदर भारी हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों और अधिकारियों के बीच यह बात चर्चा का विषय बन गई है कि आखिर किस परिस्थिति में और किन जिम्मेदार लोगों के आदेश पर इन किटों को इस प्रकार से नष्ट करने के बजाय मिट्टी में दबाया गया था।
पुराने स्टोर के मलबे में बिखरी मिलीं दवाइयां और सिरिंज
केवल वेयरहाउस के पास ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग के पुराने स्टोर भवन की स्थिति भी बेहद खराब पाई गई है। जब इस पुराने स्टोर भवन में तोड़फोड़ का कार्य चल रहा था तो उसके मलबे के बीच में मास्क और जीवन रक्षक दवाओं से भरे हुए कई बैग लावारिस हालत में दिखाई दिए। स्टोर के फर्श पर कई प्रकार की दवाइयां पूरी तरह से बिखर चुकी थीं और उन्हें संभालने वाला वहां कोई भी मौजूद नहीं था। उस परिसर के अंदर डिस्पोजल सिरिंज के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हुए कई अत्यंत महत्वपूर्ण और गोपनीय कागजात भी इधर-उधर बिखरे पड़े मिले। मौके पर मिली इन बिखरी हुई सामग्रियों में से कुछ दवाइयों के बारे में यह जानकारी सामने आ रही है कि उनका संबंध सीधे तौर पर टीकाकरण अभियान से था। इस प्रकार से सरकारी भवनों के मलबे में दवाइयों और जरूरी दस्तावेजों का यूं ही फेंका जाना विभागीय कार्यशैली पर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। इस गंभीर प्रकरण की जानकारी जब विभूतिपुर क्षेत्र के विधायक अजय कुमार को मिली तो वे तुरंत मौके पर पहुंच गए और उन्होंने हालात का जायजा लिया।
विधायक के पहुंचने पर हरकत में आया महकमा और बनी जांच कमेटी
मामले की गंभीर सूचना मिलने के बाद विभूतिपुर के विधायक अजय कुमार ने फौरन इस पर संज्ञान लिया और वे खुद घटनास्थल पर पहुंच गए। उन्होंने वहां पहुंचकर हालात का जायजा लिया और इसके बाद सिविल सर्जन डॉक्टर राजीव कुमार से मुलाकात करके अपनी कड़ी आपत्ति जताई। विधायक ने सिविल सर्जन से पूरे प्रकरण की एक निष्पक्ष जांच कराने और इसमें शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की। उन्होंने यह मुख्य सवाल भी उठाया कि आखिर भवन को तोड़ने से पहले स्टोर के अंदर रखी हुई इतनी कीमती चिकित्सा सामग्री को किसी सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं पहुंचाया गया था। विधायक के इस प्रकार मौके पर पहुंचने और कड़े सवाल उठाने के बाद सिविल सर्जन डॉक्टर राजीव कुमार ने भी तुरंत एक्शन लेते हुए मौके का निरीक्षण किया। सिविल सर्जन ने मीडिया और जनता को यह भरोसा दिलाया है कि इस पूरे मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह कमेटी पीपीई किट, दवाओं और अन्य सभी बरामद चिकित्सा सामग्री की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करेगी और जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।