अस्पताल परिसर में संदिग्ध सामग्री मिलने की घटना
सदर अस्पताल के परिसर के भीतर संदेहास्पद तरीके से कुछ सामग्री फेंके जाने का गंभीर प्रकरण प्रकाश में आया है। इस पूरी घटना के सामने आने के बाद से ही चिकित्सा प्रशासन और संबंधित महकमे में हड़कंप मच गया है। बुधवार के दिन इस अजीबोगरीब और गंभीर मामले को स्वास्थ्य प्रशासन ने पूरी गंभीरता के साथ लिया है। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की लापरवाही या संदिग्ध गतिविधियों का होना सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई प्रकार के सवाल खड़े करता है। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने तुरंत ही इस पर आंतरिक विचार-विमर्श शुरू कर दिया था। अस्पताल की साख और वहां आने वाले मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण इस विषय को हल्के में नहीं लिया जा सकता था। आम जनता और मरीजों के बीच किसी प्रकार की गलतफहमी या असुरक्षा की भावना न फैले, इसलिए इस मामले की अंदरूनी परतें टटोलना बहुत आवश्यक हो गया था। इसी उद्देश्य के तहत स्वास्थ्य प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने संज्ञान में लेते हुए इसके हर एक पहलू की गहराई से पड़ताल कराने का मन बनाया ताकि सच्चाई जल्द से जल्द बाहर आ सके।
विशेष जांच समिति का गठन और अधिकारियों के नाम
इस प्रकरण की गंभीरता को भली-भांति समझते हुए सिविल सर्जन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक विशेष जांच टीम की स्थापना की है। जारी किए गए आधिकारिक आदेशों के अनुसार इस पांच सदस्यीय विशेष दल को पूरी तरह से निष्पक्ष और त्वरित गति से जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गठित की गई इस उच्चस्तरीय जांच समिति के अध्यक्ष पद की कमान सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ। गिरीश कुमार को सौंपी गई है। इस पूरी टीम में उनके साथ अन्य कई प्रमुख अधिकारियों और चिकित्सकों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है ताकि हर एंगल से जांच हो सके। जांच दल के सदस्यों के रूप में सदर अस्पताल के ही चिकित्सक डॉ। सत्येन्द्र कुमार को भी इस समिति का हिस्सा बनाया गया है। इसके अलावा औषधीय मामलों की विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए सहायक औषधि नियंत्रक शंभू नाथ ठाकुर को भी इस समिति में शामिल किया गया है। तकनीकी और विधिक पहलुओं की गहन छानबीन करने के लिए दो औषधि निरीक्षकों अमित कुमार तथा रमेश कुमार प्रेमी को भी इस विशेष दल का सदस्य नियुक्त किया गया है। इन सभी अनुभवी अधिकारियों की यह टीम मिलकर इस बात का पता लगाएगी कि आखिर वह संदिग्ध सामग्री वहां किसने और किस उद्देश्य से फेंकी थी।
सहयोगी कर्मचारी की नियुक्ति और आगे की प्रक्रिया
इस पूरी जांच प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने और दस्तावेजों के रखरखाव के लिए प्रशासनिक सहायता का भी पूरा प्रबंध किया गया है। मुख्य रूप से गठित की गई इस पांच सदस्यीय विशेष जांच समिति के सुचारू संचालन और दैनिक सहयोग के लिए एक अन्य कर्मचारी को भी जिम्मेदारी दी गई है। सिविल सर्जन कार्यालय में कार्यरत उच्च वर्गीय लिपिक अभिषेक कुमार को इस पूरी जांच प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करने के लिए विशेष रूप से अधिकृत किया गया है। यह लिपिक समिति के सदस्यों को सभी आवश्यक कागजी कार्रवाई, रिकॉर्ड और प्रशासनिक समन्वय स्थापित करने में पूरी सहायता प्रदान करेगा। स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह बिना किसी विलंब के बहुत ही कम समय के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे। इस जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही यह पूरी तरह से साफ हो पाएगा कि इस घटना के पीछे असल में किन लोगों का हाथ था और उनका क्या मकसद था। प्रशासन की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को पूरी तरह से रोका जा सके।