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स्वास्थ्य

चिकित्सा शिक्षा में विस्तार: आईजीएमसी और टांडा में शुरू होगा रेडिएशन थेरेपी टेक्नोलॉजी कोर्स

हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जिसके तहत इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और टांडा मेडिकल कॉलेज में विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी है।

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Ankit Yadav
07 सित 2026, 14:20
चिकित्सा शिक्षा में विस्तार: आईजीएमसी और टांडा में शुरू होगा रेडिएशन थेरेपी टेक्नोलॉजी कोर्स
हिमाचल प्रदेश सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च चिकित्सा शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़ा निर्णय लिया गया है। इस नई पहल के अंतर्गत, राज्य के दो प्रमुख और प्रतिष्ठित संस्थानों यानी शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) और डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, टांडा में रेडिएशन थेरेपी टेक्नोलॉजी कोर्स की शुरुआत की जाएगी। इस कदम से न केवल मेडिकल छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, बल्कि राज्य के भीतर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कुशल तकनीशियनों की मांग को भी पूरा किया जा सकेगा।

स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया आयाम

वर्तमान समय में चिकित्सा के क्षेत्र में तकनीकी विकास बेहद तेजी से हो रहा है, विशेषकर ऑन्कोलॉजी और रेडियोथेरेपी के मोर्चे पर। ऐसे में इस प्रकार के विशेषीकृत कोर्सेज की शुरुआत होना बेहद आवश्यक माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इन दोनों चिकित्सा महाविद्यालयों में इस कोर्स के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर ही युवाओं के लिए रोजगार और उच्च शिक्षा के नए रास्ते खुलेंगे। इसके अलावा, मरीजों को समय पर और सटीक उपचार मिलने में भी काफी मदद मिलेगी क्योंकि अस्पतालों को प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से दक्ष स्टाफ मिल सकेगा, जो आधुनिक मशीनों और उपकरणों का संचालन करने में पूरी तरह सक्षम होगा। शैक्षणिक सत्र की तैयारियों के संबंध में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और कॉलेज प्रबंधन के बीच रूपरेखा तैयार की जा रही है। पाठ्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, प्रयोगशालाओं और फैकल्टी की व्यवस्था पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है ताकि छात्रों को उच्च कोटि की शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण दोनों मिल सकें। चिकित्सा शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह निर्णय प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के स्तर को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा। आने वाले दिनों में इस कोर्स से जुड़ी प्रवेश प्रक्रिया, सीटों की संख्या और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताओं को आधिकारिक तौर पर साझा किए जाने की उम्मीद है। छात्र और अभिभावक भी इस नई सौगात को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं, क्योंकि अब उन्हें इस विशेष कोर्स के लिए दूसरे राज्यों के बड़े संस्थानों का रुख नहीं करना पड़ेगा। सरकार का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि राज्य में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि आम जनता को और बेहतर चिकित्सा लाभ मिल सके।
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