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लापरवाही की हद: सिद्धार्थनगर में सांसद निधि से बने स्वास्थ्य भवन पर लगा ताला, खर्च हुए थे 69.50 लाख रुपये

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में सांसद निधि के पैसों से तैयार कराए गए स्वास्थ्य भवन पर ताला लटक रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है। इस भवन के निर्माण पर कुल 69.50 लाख रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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Ankit Yadav
04 सित 2026, 17:30
लापरवाही की हद: सिद्धार्थनगर में सांसद निधि से बने स्वास्थ्य भवन पर लगा ताला, खर्च हुए थे 69.50 लाख रुपये
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी का एक और गंभीर मामला सामने आया है। यहां जनता की भलाई और चिकित्सा सुविधाओं को सुलभ बनाने के उद्देश्य से सांसद निधि की भारी-भरकम राशि से एक स्वास्थ्य भवन का निर्माण कराया गया था। इस प्रोजेक्ट पर कुल 69.50 लाख रुपये की बड़ी धनराशि खर्च की गई थी, ताकि आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों को उनके ही क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। हालांकि, निर्माण कार्य पूरा होने के इतने लंबे समय बाद भी इस इमारत के दरवाजे आम नागरिकों के लिए नहीं खुले हैं और मुख्य द्वार पर हमेशा ताला लटका रहता है। ग्रमीण इलाकों में आधारभूत चिकित्सा सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए सरकारों द्वारा लगातार विभिन्न योजनाओं के तहत बजट जारी किया जाता है। सिद्धार्थनगर में बना यह स्वास्थ्य भवन भी इसी उद्देश्य का एक हिस्सा था ताकि जरूरतमंद मरीजों को छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए दूरदराज के शहरी अस्पतालों के चक्कर न काटने पड़ें। लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और अधिकारियों की उदासीनता के कारण लाखों रुपये की लागत से खड़ी की गई यह बहुमूल्य इमारत मात्र एक शोपीस बनकर रह गई है। इमारत के कमरों में धूल फांकते सामान और सुनसान पड़े गलियारे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं।

जनता का पैसा बेकार, जवाब देने से बच रहे जिम्मेदार

स्थानीय निवासियों और क्षेत्रीय लोगों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि उनके इलाके के विकास के लिए आया हुआ जनता का पैसा इस तरह बर्बाद हो रहा है। लोगों का कहना है कि जब इस स्वास्थ्य भवन का निर्माण किया गया था, तब उन्हें उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें इलाज के लिए भारी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। लेकिन भवन बनकर पूरी तरह तैयार होने के बावजूद इस पर ताला जड़े रहना और चिकित्सा स्टाफ की तैनाती न होना अधिकारियों की लापरवाही को साफ तौर पर उजागर करता है। कई बार स्थानीय लोगों ने इस मुद्दे को उठाया है, परंतु अभी तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं के दावे और जमीनी हकीकत

प्रदेश सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य नेटवर्क को मजबूत करने और हर नागरिक तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के दावे करती हो, लेकिन सिद्धार्थनगर की यह तस्वीर उन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। करोड़ों-लाखों रुपये के बजट से तैयार परिसरों का संचालन शुरू न होना धन के सदुपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते इस स्वास्थ्य भवन का ताला नहीं खोला गया और यहां डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गई, तो जनता का यह गुस्सा और अधिक बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों ने अब शासन स्तर पर उच्चाधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि इस बंद पड़े भवन को जल्द से जल्द शुरू किया जा सके।
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