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सख्ती का दौर: जोबनेर हादसे के बाद बाल वाहिनी वाहनों पर परिवहन विभाग की प्रदेशव्यापी जांच शुरू

जोबनेर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद राजस्थान परिवहन विभाग ने बाल वाहिनी वाहनों पर पूरी तरह से नकेल कसनी शुरू कर दी है, जिसके तहत पूरे प्रदेश में विशेष जांच अभियान का आगाज किया गया है।

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Ankit Yadav
01 सित 2026, 19:40
सख्ती का दौर: जोबनेर हादसे के बाद बाल वाहिनी वाहनों पर परिवहन विभाग की प्रदेशव्यापी जांच शुरू
राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित पूरे प्रदेश में स्कूली बच्चों को ढोने वाले वाहनों यानी बाल वाहिनियों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग अब पूरी तरह से गंभीर हो गया है। हाल ही में जोबनेर क्षेत्र में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के बाद सरकार और प्रशासन नींद से जागा है, जिसके फलस्वरूप सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले वाहनों के खिलाफ बड़े पैमाने पर शिकंजा कसा जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों की जान जोखिम में डालने वाले किसी भी वाहन को बख्शा नहीं जाएगा और मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाएगा।

कड़े सुरक्षा मानदंडों की होगी जांच

इस विशेष प्रदेशव्यापी अभियान के दौरान परिवहन अधिकारियों द्वारा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों से अनुबंधित किए गए वाहनों की फिटनेस, ड्राइवर के लाइसेंस, अग्निशामक यंत्र, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स और वाहनों की गति सीमा से जुड़े तमाम दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुप्रीम कोर्ट और परिवहन विभाग द्वारा स्कूल बसों और बाल वाहिनियों के लिए तय किए गए सुरक्षा दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन हो रहा है या नहीं। कई जगहों पर बिना परमिट और ओवरलोडिंग के संचालित होने वाली गाड़ियों पर मौके पर ही भारी जुर्माना लगाने और उन्हें सीज करने की कार्रवाई भी की जा रही है।

अभिभावकों और स्कूलों की बढ़ी चिंता

इस अचानक शुरू हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई से उन स्कूलों और वाहन चालकों में हड़कंप मच गया है जो अक्सर नियमों को ताक पर रखकर बच्चों को ढोते नजर आते हैं। दूसरी ओर, बच्चों के अभिभावकों ने इस कदम का स्वागत करते हुए प्रशासन से मांग की है कि इस तरह के चेकिंग अभियान केवल कुछ दिनों के लिए न होकर लगातार चलते रहने चाहिए ताकि भविष्य में जोबनेर जैसी किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की सख्ती से न केवल स्कूल संचालकों में डर पैदा होगा बल्कि वे अपने बेड़े में शामिल वाहनों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों को लेकर अधिक सतर्क भी रहेंगे। आने वाले दिनों में परिवहन विभाग द्वारा फ्लाइंग स्क्वॉड टीमों को और अधिक सक्रिय किए जाने की संभावना है जो औचक निरीक्षण कर लापरवाह चालकों के विरुद्ध कड़े कदम उठाएंगी। प्रशासन की इस मुहिम का मुख्य मकसद स्कूली बच्चों के आवागमन को पूरी तरह सुरक्षित बनाना और सड़क हादसों पर प्रभावी अंकुश लगाना है, जिससे हर माता-पिता अपने बच्चों को बेफिक्र होकर स्कूल भेज सकें।
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