कार्यालय के बाहर अप्रत्याशित गतिविधि
कानपुर नगर स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के बाहर उस समय अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब वहां एक संदिग्ध वाहन आ पहुंचा। इस वाहन पर विशेष टास्क फोर्स यानी एसटीएफ का नाम लिखा हुआ था जिसे देखते ही वहां मौजूद लोगों की सांसें थम गईं। आम तौर पर इस दफ्तर के इर्द-गिर्द विभिन्न लाइसेंस और पंजीकरण कार्यों के नाम पर अवैध वसूली करने वाले बिचौलियों का जमघट लगा रहता है। जैसे ही यह गाड़ी परिसर के पास रुकी और लोगों की नजर उस पर पड़ी तो वहां मौजूद दलाल बुरी तरह डर गए। उन्हें लगा कि शायद किसी बड़ी जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ कोई गोपनीय कार्रवाई करने के लिए यहां छापा मार दिया है। इस परिस्थिति के कारण वहां एक अजीब सा सन्नाटा पसर गया और लोग अपनी दुकानें व ठिकाने छोड़कर इधर-उधर भागने लगे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अचानक यह वाहन यहां कैसे आ गया और इसके आने के पीछे का असली मकसद क्या था। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने कुछ ही पलों में पूरे इलाके का पूरा माहौल पूरी तरह से बदल कर रख दिया।
बिचौलियों और दलालों में फैली दहशत
वाहन पर अंकित नाम को देखते ही क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के बाहर काम कराने आने वाले आम नागरिकों को छोड़कर बाकी सारे बिचौलिये सकते में आ गए। इन दलालों का मुख्य काम कार्यालय के भीतर फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाने के नाम पर भोले-भाले लोगों से अवैध रूप से पैसे ऐंठना होता है। जब वाहन वहां खड़ा हुआ तो इनमें से कई लोगों ने तुरंत अपने ठिकाने बदलने शुरू कर दिए ताकि वे किसी भी संभावित कानूनी कार्रवाई की चपेट में न आ जाएं। कुछ लोगों ने तो अपनी दुकाने और टेबल तुरंत बंद कर दीं और भीड़ का फायदा उठाकर मौके से नौ दो ग्यारह हो गए। इस दौरान कार्यालय के कामकाज के सिलसिले में आए आम लोग भी इस पूरी हलचल को बड़ी हैरानी भरी नजरों से देखते रहे क्योंकि उन्हें पहले तो माथापचियों का कारण समझ नहीं आया। बाद में जब उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि गाड़ी किसी विशेष बल से जुड़ी हो सकती है तो वे भी सतर्क हो गए। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी आधिकारिक गिरफ्तारी या पूछताछ की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई थी लेकिन डर का यह माहौल काफी देर तक बना रहा।
कार्यालयों के बाहर सक्रियता और पृष्ठभूमि
देशभर के विभिन्न सरकारी और प्रशासनिक दफ्तरों के बाहर इस प्रकार के बिचौलियों का सक्रिय रहना एक बहुत पुरानी और गंभीर समस्या बन चुका है। परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में जनता अक्सर अपने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाहन के कागजात तैयार करवाने और पंजीकरण के सिलसिले में पहुंचती है। कागजी कार्रवाई की जटिलताओं का फायदा उठाकर ये दलाल आम नागरिकों को अपने जाल में फंसाते हैं और उनसे मनमाने पैसे वसूल करते हैं। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ऐसे तत्वों पर लगाम कसने के लिए समय-समय पर औचक निरीक्षण और विशेष अभियान जैसी कार्रवाई करते रहते हैं। इस तरह के अभियानों का मुख्य उद्देश्य दलाल संस्कृति को पूरी तरह से समाप्त करना और सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता को बढ़ावा देना होता है। जब भी इस प्रकार की कोई गाड़ी या पुलिस बल किसी कार्यालय के बाहर नजर आता है तो अवैध काम करने वालों में स्वाभाविक रूप से खलबली मच जाती है। ऐसी घटनाएं प्रशासन के डर को जिंदा रखती हैं और बिचौलियों को कुछ समय के लिए अपने अवैध कारनामों से दूर रहने पर मजबूर कर देती हैं।