कंटाप
NEWS
बुधवार, 16 सितंबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
दो हज़ार रुपये से अधिक की इस यूपीआई पेमेंट पर लगेगा चार्ज, जानिए आम लोगों पर क्या होगा असर      पाकिस्तान ने 'मोस्ट वॉन्टेड' मसूद अज़हर पर क्यों बढ़ाई इनामी रकम      हूती विद्रोहियों के हमले के बीच सऊदी अरब ने मक्का और जेद्दाह में जारी किए थे अलर्ट      Gurugram Hit And Run Case Live: गुरुग्राम में महिला बाइकर को टक्कर मारने वाला आरोपी गिरफ्तार, राजस्थान से प...      सऊदी ने 30 साल में पहली बार चलाई चीन से मिली DF-15A मिसाइल, हूतियों को बनाया निशाना, यमन के रेगिस्तान में गिरी      बिहार में UCC किसी कीमत पर लागू नहीं होगा, अमित शाह के ऐलान के बाद बोले जदयू MLA      नंदीग्राम उपचुनाव में BJP का बड़ा दांव, CM शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत PA की मां को टिकट; रेजीनगर से किसे बना      'राहुल गांधी ने अपने नेताओं पर क्यों चुप्पी साधी', हरीश रावत के पीए के ठिकाने पर पड़ा छापा तो बांसुरी स्वराज ने उठाए सवाल     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
लोकल

बड़ी उपलब्धि: बरेली में जन्मा देश का पहला एलीट गिर बछड़ा, जेनेटिकली सेलेक्टेड गाय रोज देगी 40 से 60 लीटर दूध

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक ऐतिहासिक घटना के तहत देश के पहले एलीट गिर बछड़े का जन्म हुआ है, जिससे भविष्य में उच्च दूध उत्पादन की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

A
Ankit Yadav
15 सित 2026, 17:39
बड़ी उपलब्धि: बरेली में जन्मा देश का पहला एलीट गिर बछड़ा, जेनेटिकली सेलेक्टेड गाय रोज देगी 40 से 60 लीटर दूध
उत्तर प्रदेश के पशुपालन और कृषि क्षेत्र में एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। राज्य के बरेली जिले में देश का पहला एलीट गिर नस्ल का बछड़ा जन्मा है, जिसने पूरे क्षेत्र और वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। यह बछड़ा उन्नत आनुवंशिक तकनीकों और वैज्ञानिक चयन प्रक्रिया के माध्यम से विकसित किया गया है, जो भारत में डेयरी उद्योग और स्वदेशी नस्लों के संरक्षण की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है।

वैज्ञानिक अनुसंधान और भविष्य की संभावनाएं

पारंपरिक पशुपालन की तुलना में इस प्रकार के जेनेटिकली सेलेक्टेड यानी आनुवंशिक रूप से चयनित पशुओं की प्रजनन क्षमता और उत्पादन क्षमता काफी अधिक होती है। इस नस्ल के विकास के पीछे मुख्य उद्देश्य देश में उच्च गुणवत्ता वाले दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस विशेष चयन प्रक्रिया से तैयार की जाने वाली गायें भविष्य में सामान्य से कहीं अधिक मात्रा में दूध देने में सक्षम होंगी, जिससे किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा। अनुमान जताया जा रहा है कि इस उन्नत प्रक्रिया से जुड़ी गायें भविष्य में रोजाना लगभग 40 से 60 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखेंगी। पारंपरिक गिर नस्ल की तुलना में यह आंकड़ा काफी अधिक है, क्योंकि आम तौर पर देशी नस्लें इतनी मात्रा में दूध नहीं देती हैं। इस उल्लेखनीय उपलब्धि से देश भर के डेयरी किसानों में भारी उत्साह का माहौल है और वे इस तकनीक को अपनाने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहे हैं।

डेयरी उद्योग पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव

इस तरह के नवाचारों से भारत के डेयरी सेक्टर को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलने की पूरी उम्मीद है। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि इस तकनीक का विस्तार देश के अन्य हिस्सों में भी किया जाए, तो दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में एक नई क्रांति आ सकती है। सरकार और विभिन्न अनुसंधान संस्थान भी स्वदेशी नस्लों के संवर्धन के लिए इस प्रकार की पहलों को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सके। बरेली में जन्मा यह एलीट बछड़ा आने वाले समय में देश के पशुधन विकास कार्यक्रमों के लिए एक बड़ा आधार बनेगा। स्थानीय प्रशासन और पशुपालन विभाग से जुड़े अधिकारी भी इस ऐतिहासिक जन्म को लेकर बेहद उत्साहित हैं और वे इस दिशा में आगे के शोध कार्यों को और अधिक गति देने की योजना बना रहे हैं।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज