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भाखड़ा बांध मरम्मत: तीन दिन की कोशिशें नाकाम रहने पर चौथे दिन अपनाई गई नई तकनीक

भाखड़ा डैम में आए कटान को दुरुस्त करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। शुरुआती तीन दिनों तक की गई तमाम कोशिशें असफल रहने के बाद, अब चौथे दिन एक उन्नत तकनीक का सहारा लिया जा रहा है जिसके तहत बिलासपुर में पानी का रुख मोड़ा गया है।

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Ankit Yadav
30 अग 2026, 12:36
भाखड़ा बांध मरम्मत: तीन दिन की कोशिशें नाकाम रहने पर चौथे दिन अपनाई गई नई तकनीक
हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित भाखड़ा बांध में पिछले कुछ दिनों से जल प्रवाह और संरचनात्मक कटान की गंभीर समस्या बनी हुई है। डैम की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों और इंजीनियरों की विशेष टीमें लगातार मुस्तैद हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसे एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि पानी के तेज बहाव और कटान के कारण पारंपरिक तरीकों से मरम्मत कार्य को आगे बढ़ा पाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा था। बांध की अखंडता देश के एक बड़े हिस्से के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं छोड़ी जा रही है।

शुरुआती प्रयास रहे विफल

विगत तीन दिनों से लगातार जारी मरम्मत कार्य और तमाम कोशिशें अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही थीं। पानी के भारी दबाव और कटान के स्थान पर सीधी पहुंच न होने के कारण इंजीनियरों की शुरुआती योजनाएं ध धरी रह गईं। तकनीकी विशेषज्ञों ने स्थिति का बारीकी से आकलन किया और यह निष्कर्ष निकाला कि जब तक पानी के दबाव को नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक पारंपरिक विधियों से रिसाव या कटान को रोकना असंभव है। इसके बाद ही एक नए और अधिक प्रभावी एक्शन प्लान पर विचार किया गया, जिससे स्थिति पर काबू पाया जा सके।

बिलासपुर में मोड़ा गया जल प्रवाह

चौथे दिन हालात से निपटने के लिए बिल्कुल नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है। इस नई रणनीति के तहत बिलासपुर के पास पानी के प्राकृतिक बहाव को मोड़ने का बड़ा कदम उठाया गया है। जल प्रवाह की दिशा बदलने से प्रभावित क्षेत्र में पानी का दबाव काफी हद तक कम हो गया है, जिससे तकनीकी दलों को कटान वाली जगह पर पहुंचकर मरम्मत कार्य तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। इस प्रक्रिया में भारी मशीनरी और विशेष उपकरणों को भी तैनात किया गया है ताकि काम को कम से कम समय में सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सके।

प्रशासन और विशेषज्ञों की पैनी नजर

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान स्थानीय प्रशासन और बांध सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी हर पल की गतिविधि पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नई तकनीक पूरी तरह सफल रही, तो जल्द ही कटान पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पानी के मोड़े गए रुख से किसी बड़े खतरे की संभावना को टालने में मदद मिलेगी। आने वाले घंटों में मरम्मत कार्य की प्रगति के आधार पर अगले कदम तय किए जाएंगे।
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