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जबलपुर में सफाई संकट: डीजल की कमी से कचरा वाहनों का संचालन ठप

जबलपुर नगर निगम में ईंधन की भारी किल्लत के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। कचरा उठाने वाले वाहनों को पर्याप्त डीजल न मिलने से शहर के कई इलाकों में पिछले तीन दिनों से कचरा नहीं उठा है।

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Ankit Yadav
30 अक्ट 2026, 10:43
जबलपुर में सफाई संकट: डीजल की कमी से कचरा वाहनों का संचालन ठप

कचरा वाहनों का संचालन बुरी तरह प्रभावित

जबलपुर नगर निगम की कचरा परिवहन सेवा वर्तमान में एक गंभीर डीजल संकट से जूझ रही है। शहर में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार ट्रिपर और अन्य कचरा वाहनों को उनकी जरूरत के मुताबिक ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। स्थिति इतनी खराब हो गई है कि संचालन में लगे कई वाहनों को केवल 2 से 3 लीटर डीजल ही दिया जा रहा है, जो उनके पूरे दिन के रूट के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। इस ईंधन की कमी के कारण वाहन अपने निर्धारित रास्तों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं और शहर के अधिकांश हिस्सों में सफाई का काम ठप पड़ गया है। पिछले तीन दिनों से कचरा उठाने वाले ट्रिपर के न आने से स्थानीय निवासियों के बीच भारी असंतोष व्याप्त है। कचरा संग्रहण का पूरा चक्र बाधित होने के कारण सड़कों और मोहल्लों में गंदगी का अंबार लग गया है, जो शहर के नागरिकों के लिए स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं पैदा कर रहा है।

नगर निगम और विपक्ष के बीच तीखी तकरार

इस डीजल संकट को लेकर जबलपुर नगर निगम में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। विपक्षी दलों का स्पष्ट आरोप है कि निगम प्रशासन कचरा परिवहन जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए आवश्यक ईंधन की व्यवस्था करने में पूरी तरह विफल रहा है। विपक्ष ने दावा किया है कि समय पर भुगतान न होने और ईंधन आपूर्ति की उचित योजना न बनाने की वजह से यह संकट पैदा हुआ है, जिसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। विपक्ष की मांग है कि सफाई व्यवस्था जैसी आवश्यक सेवा में किसी भी स्तर पर धन या ईंधन की कमी नहीं होनी चाहिए। वहीं, दूसरी ओर महापौर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। महापौर का तर्क है कि नगर निगम के खजाने में डीजल के लिए पैसों की कोई कमी नहीं है। हालांकि, पैसों की उपलब्धता के दावे के बावजूद धरातल पर वाहनों को डीजल क्यों नहीं मिल पा रहा है, इस बारे में निगम स्तर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।

सफाई व्यवस्था पर डीजल संकट का असर

शहर की सफाई व्यवस्था पर डीजल संकट का सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कचरा प्रबंधन एक ऐसी सेवा है जो निरंतरता की मांग करती है, और वाहनों के ईंधन न मिलने से यह पूरी श्रृंखला ही ध्वस्त हो गई है। यदि वाहनों को उनकी दैनिक आवश्यकता के अनुसार डीजल नहीं मिलता है, तो कचरा उठाने की पूरी प्रणाली भविष्य में भी प्रभावित बनी रहेगी। नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच यह स्पष्ट है कि यदि जल्द ही ईंधन आपूर्ति को सुचारू नहीं किया गया, तो शहर के निवासियों को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विपक्ष लगातार निगम प्रशासन को चेतावनी दे रहा है कि सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के प्रति लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फिलहाल निगम और विपक्ष के बीच डीजल आपूर्ति और कचरा परिवहन को लेकर तीखा टकराव बना हुआ है, जबकि शहर की जनता ईंधन की कमी के इस संकट के समाधान का बेसब्री से इंतजार कर रही है।

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