परियोजना की वर्तमान स्थिति और सिविल कार्य
राजधानी जयपुर के पश्चिमी छोर को भूमिगत और उन्नत रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। बढ़ती हुई आबादी और सड़कों पर वाहनों के भारी दबाव के बीच शहर के परिवहन ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य के तहत लगभग 400 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से जयपुर मेट्रो फेज-1D परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। इस विशिष्ट योजना के अंतर्गत मानसरोवर इलाके से लेकर 200 फीट बाईपास तक लगभग दो किलोमीटर लंबे उन्नत मार्ग का निर्माण हो रहा है। इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल कर लिया गया है। इस पूरे मार्ग पर सभी आवश्यक पिलर और आई-गर्डर स्थापित करने का मुख्य चरण पूरी तरह से संपन्न हो चुका है। इसे निर्माण कार्य के तकनीकी पहलुओं में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि अभी तक रेलगाड़ियों के सुचारू आवागमन के लिए पटरियां बिछाने का काम शेष है। इसके अलावा विद्युत आपूर्ति प्रणाली और सिग्नलिंग जैसी तमाम तकनीकी व्यवस्थाओं को स्थापित किया जाना बाकी है। इन सभी बचे हुए तकनीकी और बुनियादी कार्यों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने की पूरी योजना बनाई गई है ताकि तय अवधि में सेवाएं शुरू हो सकें।
अंतिम स्टेशन और यात्रियों की अनुमानित संख्या
इस नई मेट्रो परियोजना का आखिरी स्टेशन अजमेर बाईपास चौराहे पर बनाए जाने का पूरा प्रावधान है। इस स्टेशन के तैयार होने से मानसरोवर से आगे की तरफ स्थित 200 फीट बाईपास और अजमेर रोड के आसपास बसने वाली नई आवासीय बस्तियों को सीधा लाभ मिलेगा। इन तमाम इलाकों में लगातार बढ़ रही व्यावसायिक गतिविधियों और सड़क परिवहन के बढ़ते दबाव के बीच सार्वजनिक परिवहन की यह सुविधा बेहद कारगर साबित होगी। परिवहन अधिकारियों का मानना है कि इस मार्ग पर मेट्रो सेवा शुरू होने के बाद प्रतिदिन लगभग 1.10 लाख यात्री सफर कर सकेंगे। हालांकि इस बात की असली पुष्टि मेट्रो का व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद ही हो पाएगी। यात्रियों की भारी संख्या जब मेट्रो की तरफ आकर्षित होगी तो शहर की मुख्य सड़कों पर दौड़ने वाले निजी वाहनों पर लोगों की निर्भरता स्वतः कम हो जाएगी। इससे सड़कों पर यातायात का भारी दबाव काफी हद तक घट जाएगा और शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित रूप ले लेगी। नागरिकों को सड़क मार्ग के अलावा सफर करने का एक तेज और आरामदायक सार्वजनिक विकल्प मिल जाएगा, जिससे उनकी रोजाना की यात्रा बेहद सुगम हो जाएगी और समय की भी उल्लेखनीय बचत होगी।
पूर्ण होने की समय-सीमा और दूरगामी लाभ
इस पूरे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए जून 2027 की समय-सीमा तय की गई है। लगभग 400 करोड़ रुपये का यह भारी निवेश केवल तात्कालिक परिवहन सुविधाओं के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जयपुर के दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे के विकास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। जब यह परियोजना पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी तो मानसरोवर से 200 फीट बाईपास तक मेट्रो की सीधी पहुंच स्थापित हो जाएगी। इसके साथ ही जयपुर मेट्रो फेज-1C और फेज-1D के काम मुकम्मल होने के बाद शहर का कुल रेल नेटवर्क लगभग 18 किलोमीटर लंबा हो जाने की पूरी संभावना है। इससे 200 फीट बाईपास इलाके से सीधे ट्रांसपोर्ट नगर तक मेट्रो के माध्यम से निर्बाध आवागमन संभव हो सकेगा। यह अभूतपूर्व विस्तार जयपुर शहर के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों को आपस में मजबूती के साथ जोड़ेगा। नए विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों को बेहतरीन कनेक्टिविटी मिलने से शहर के नागरिकों का जीवन स्तर सुधरेगा और सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क बेहद मजबूत स्थिति में आ जाएगा।