अतिरिक्त मुख्य सचिव की भूमिका और विवाद
राजस्थान के उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर तैनात रहे शिखर अग्रवाल के खिलाफ गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार शिखर अग्रवाल ने जिस गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से विला खरीदे थे, उसी कंपनी को सरकारी स्तर पर विशेष वित्तीय पैकेज प्रदान किया गया। उद्योग विभाग के अधिकारी होने के नाते शिखर अग्रवाल उन फैसलों में निर्णायक भूमिका निभाते थे, जिसके तहत कंपनियों को निवेश के आधार पर विशेष छूट दी जाती थी। इस मामले में अलवर जिले की थानागाजी तहसील के अजबगढ़ गांव स्थित होटल और रिसॉर्ट परियोजना के लिए वित्त विभाग ने निवेश बोर्ड की छठी बैठक के सुझावों पर अमल किया। सरकारी प्रक्रिया के तहत औद्योगिक निवेश करने वाली फर्मों को छूट देने का अंतिम निर्णय उद्योग विभाग के भीतर लिया जाता है, जिसे बाद में वित्त विभाग द्वारा विधिवत जारी किया जाता है। इस पूरे प्रकरण में कंपनी को लाभ पहुँचाने के बदले निजी स्तर पर सौदे करने के आरोपों की जांच की मांग उठ रही है।
वित्तीय पैकेज की शर्तें और निवेश का ब्यौरा
गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को मिली राहत का दायरा काफी विस्तृत है जिसमें राज्य कर की 75 प्रतिशत राशि की वापसी और दस वर्षों के लिए शत-प्रतिशत बिजली शुल्क में छूट शामिल है। सरकार के आदेश के मुताबिक इस कंपनी को 115 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करना है और कुल 241 लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया कराने होंगे। इस रोजगार लक्ष्य में 202 प्रत्यक्ष और 39 अप्रत्यक्ष नियुक्तियां शामिल हैं। प्रशासन ने स्पष्ट शर्त रखी है कि यदि कंपनी तय समय सीमा के भीतर अपने निवेश और रोजगार के लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहती है, तो उसे दी गई सभी रियायतों को ब्याज सहित वापस वसूला जाएगा। इसके अलावा कंपनी को किसी अन्य सरकारी योजना के तहत दोहरा लाभ लेने की अनुमति नहीं है। इस विवादास्पद पैकेज की घोषणा उसी दिन हुई जिस दिन अधिकारी के परिवार ने अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 विला की आधिकारिक रजिस्ट्री पूरी की थी। इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
संपत्ति की खरीद और जांच की मांग
अग्रवाल परिवार के निवेश का इतिहास बताता है कि उन्होंने करीब ढाई वर्षों के अंतराल में कुल 40 विला और कॉटेज खरीदे हैं। इनमें से 20 इकाइयां मार्च 2026 में अजबगढ़ रिसॉर्ट में ली गई थीं और उससे पहले सितंबर 2023 में उदयपुर के बुझाड़ा स्थित रिसॉर्ट में 20 कॉटेज खरीदे गए थे। इन सभी 40 संपत्तियों के लिए कुल 6.16 करोड़ रुपये का निवेश किया गया और बाद में इन्हें उसी कंपनी को लीज पर देकर 1.80 करोड़ रुपये की सालाना आय अर्जित करने का दावा है। शिखर अग्रवाल ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि इन संपत्तियों का ब्यौरा उन्होंने अपने वार्षिक संपत्ति विवरण और रिटर्न में पारदर्शी तरीके से दिया है। हालांकि कांग्रेस के प्रताप सिंह खाचरियावास ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी से गहन जांच और सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की पुरजोर मांग उठाई है। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ का मानना है कि अधिकारी दंपति अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देने में पूर्णतः समर्थ हैं। वर्तमान में शिखर अग्रवाल को एपीओ यानी पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है।